जसवंत की किताब पर से प्रतिबंध हटा (लीड-1)
मुख्य न्यायाधीश के. एस. राधाकृष्णन, न्यायमूर्ति अकील कुरेशी और न्यायमूर्ति के. एम. ठाकर की एक पूर्ण पीठ ने एक जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए किताब पर लगाए गए प्रतिबंध के खिलाफ फैसला सुनाया।
अदालत के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए सिंह ने संवाददाताओं से कहा, "इस फैसले से मैं बेहद खुश हूं। न्यायपालिका का यह सकारात्मक कदम है।"
उन्होंने कहा, "मैंने अपनी किताब में किसी के लिए भी अपशब्द नहीं लिखा है, फिर इस पर प्रतिबंध क्यों।"
जसवंत की इस पुस्तक के विमोचन के दो दिनों के बाद ही उन्हें भाजपा से निष्कासित कर दिया गया था। गुजरात सरकार ने इसके बाद उसी दिन गत 19 अगस्त को अधिसूचना जारी कर उनकी किताब की बिक्री और उसके वितरण पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया था कि किताब के कुछ अंश आपत्तिजनक हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ता मनीषी जानी और प्रकाश एन. शाह ने राज्य सरकार के इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में कहा गया था कि किताब को बगैर पढ़े ही राज्य सरकार ने इस पर पाबंदी लगा दी।
जानी ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा, "हमारी चिंता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को लेकर है। हर किसी को किताब पढ़ने का अधिकार है।"
दोनों याचिका दायरकर्ताओं के वकील आनंद याग्निक ने कहा, "अदालत ने माना कि राज्य सरकार ने किताब को बगैर पढ़े ही पर उस पर प्रतिबंध लगा दिया।"
ज्ञात हो कि सर्वोच्च न्यायालय ने भी गत मंगलवार को गुजरात सरकार को नोटिस जारी करते हुए किताब पर प्रतिबंध लगाने का कारण पूछा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications