पहले सत्ता और अब अंतिम यात्रा का साक्षी बना शास्त्री स्टेडियम
हजारों की भीड़ उस वक्त भी हैदराबाद के इस स्टेडियम में मौजूद थी जब रेड्डी दूसरी बार आंध्र प्रदेश की सत्ता के शिखर पर आसीन हो रहे थे लेकिन उससे कहीं ज्यादा भीड़ शुक्रवार को इसी स्टेडियम में थी जब रेड्डी का पार्थिव शरीर यहां था।
लोगों की संख्या भले ही दोनों बार हजारों में रही हो लेकिन मौका और दस्तूर अलग था। 20 मई को रेड्डी के सिर पर सत्ता का ताज था तो चार सितंबर को वह चिर निद्रा में लीन थे और बिलखती जनता अपने इस प्रिय नेता को आखिरी बार जी भर के देख लेना चाहती थी।
रेड्डी के पुत्र वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी को अपने पिता के पार्थिव शरीर के बगल में खड़ा देख हर कोई उन्हें सांत्वना और संवेदना देने उनकी ओर लपक रहा था। यह इस करिश्माई नेता के प्रति लोगों के प्रेम का नतीजा था कि शुक्रवार को मानो हर कोई स्टेडियम में प्रवेश चाहता था।
गौरतलब है कि बुधवार को एक हेलीकॉप्टर हादसे में मारे गए रेड्डी ने 14 मई, 2004 को भी इसी स्टेडियम में पहली बार आंध्र पदेश के मुख्यमंत्री पद भी शपथ ली थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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