विश्व व्यापार वार्ता : भारत का संरक्षणवाद खत्म करने पर जोर (राउंडअप)
यह अनौपचारिक वार्ता इस साल नवंबर में जिनेवा में होने वाली विश्व व्यापार वार्ता को गति प्रदान करने के लिए की जा रही है।
153 सदस्यीय विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के सदस्य देशों के वाणिज्यिक मंत्रियों की एक बैठक को संबोधित करते हुए वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा ने कहा कि अभी भी कुछ देश संरक्षणवाद की नीति पर चल रहे हैं।
उन्होंने कहा, "हमें दोहा वार्ता चक्र की समय सीमा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। यह समय सीमा 2010 में समाप्त हो जाएगी। हमें अभी से ही वैश्विक बहुपक्षीय वार्ताओं को सफल बनाने के किए प्रयासरत रहना होगा।"
उन्होंने कहा कि वर्तमान चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल में न्यायपूर्ण और समतावादी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार प्रणाली महत्वपूर्ण है।
शर्मा ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी विश्व व्यापार वार्ताओं की सफलता को लेकर गंभीर है और यही वजह है कि हम अतीत में इस मसले पर वाशिंगटन, लंदन, बाली, सिंगापुर आदि शहरों में बातचीत कर चुके हैं।
उन्होंने कहा, "संरक्षणवाद की नीति ऐसी वार्ताओं की सफलता की राह में रोड़ा रही है। हमें इससे मुक्त होना पड़ेगा।"
इससे पहले विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के महानिदेशक पास्कल लेमी ने भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (फिक्की) द्वारा आयोजित एक सम्मेलन में कहा कि हाल में कुछ देशों द्वारा उठाए गए आर्थिक कदमों से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर असर पड़ा है।
लेमी ने कहा कि वैश्विक आर्थिक संकट से अपने घरेलू बाजारों को बचाने के लिए कुछ देशों के प्रतिबंधात्मक कदमों से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर दुष्प्रभाव पड़ा है और इन्हें निश्चित रूप से खोला जाना चाहिए।
लेमी ने कहा, "कुछ देशों ने शुल्क बढ़ाया है, नए गैर शुल्क उपाय लागू किए हैं और भंडारण रोधी कार्रवाई तेज की हैं।"
दोहा दौर की वार्ता को फिर से पटरी पर लाने के लिए भारत सरकार के निमंत्रण पर यहां आए लेमी ने कहा कि इससे अभी तक जैसे को तैसा जवाब देने की श्रृंखला नहीं आरंभ हुई है लेकिन इससे व्यापार के कुछ धीमा होने से इंकार नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि एक दूसरे पर दोषारोपण करने की बजाए सतर्क रहने और डब्ल्यूटीओ के सदस्यों को एक दूसरे के लिए बाजार खोलना चाहिए।
डब्ल्यूटीओ के 153 सदस्य देशों में से 40 के प्रतिनिधियों की गुरुवार को आरंभ हुई दो दिवसीय मंत्रीस्तरीय बैठक का उल्लेख करते हुए लेमी ने कहा कि दिल्ली दोहा दौर की वार्ता को फिर से आरंभ कर सकता है।
उल्लेखनीय है कि कतर की राजधानी दोहा में वर्ष 2001 में आरंभ हुई दोहा दौर की वार्ता कृषि सब्सिडी, निर्यात और बाजार पहुंच के मुद्दों पर धनी और विकासशील देशों के बीच पैदा हुए तीखे मतभेदों के कारण किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है।
उधर कृषि को विश्व व्यापार वार्ता में शामिल किए जाने के विरोध में भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के नेता महेंद्र सिंह टिकैत के नेतृत्व में हजारों किसानों ने नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications