पांच नदियों के बाद भी प्यासा है बुन्देलखण्ड : राजा बुन्देला
अलग राज्य की मुहिम को एक बार फिर धार देने निकले फिल्म अभिनेता और बुन्देलखण्ड मुक्ति मोर्चा के अध्यक्ष राजा बुन्देला ने आईएएनएस को बताया, "बुन्देलखण्ड में मंदाकिनी, केन, बागैं, बेतवा व यमुना जैसी पांच नदियां बहती हैं। फिर भी यहां की धरती प्यासी और सूखी है। सूखे की मार से किसान आत्महत्या को मजबूर हैं। बुन्देलखण्ड में इतनी क्षमता है कि वह अपने लिए भरपूर बिजली का उत्पादन कर सकता है। फिर भी इस इलाके का किसान और हर गांव-कस्बा बिजली के लिए तरस रहा है।"
बुंदेला ने कहा कि बुन्देलखण्ड के वाशिन्दे शोषण के शिकार हैं। हीरा, पन्ना, जस्ता, तांबा, ग्रेनाइट, मौरंग इत्यादि खनिजों से भरपूर बुन्देलखण्ड विकास के लिए छटपटा रहा है। सारी समस्याओं से निजात बुन्देलखण्ड को अलग राज्य बनाने से ही संभव है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश में बंटा बुन्देलखण्ड दो सूबों के पाट के बीच पिस रहा है। देश के मानचित्र में इसकी पहचान मिटती जा रही है।
राजा बुन्देला ने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के जिलों को मिलाकर नक्शा भी प्रकाशित किया जा चुका है। मध्य प्रदेश सरकार पूरी तरह राजी है और वह प्रस्ताव भी बना चुकी है, मगर उत्तर प्रदेश सरकार इस पर चुप्पी साधे हुए है।
बुन्देला एक बार फिर अलग बुन्देलखण्ड राज्य का अलख जगाने निकल पड़े हैं। समूचे बुन्देलखण्ड में सभाएं व सम्पर्क करने की उनकी योजना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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