नेपाल में फिर सुलगा पशुपतिनाथ विवाद

'इंद्र जात्रा' उत्सव के दौरान सरकार के इस फैसले से गुरुवार को राजधानी काठमांडू में हिंसा भड़क उठी। पशुपतिनाथ की ओर जाने वाली सड़कों को गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने बंद कर दिया।

प्रदर्शनकारी 'भारतीय पुजारी, भारत जाओ' का नारा लगा रहे थे। बुधवार शाम प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल ने पशुपतिनाथ मंदिर में दो भारतीय पुजारियों की नियुक्ति का फैसला सुनाया था, जिसके बाद से ही यहां प्रदर्शन शुरू हो गए थे।

इससे पहले नेपाल की पूर्ववर्ती माओवादी सरकार ने 300 वर्ष पुरानी उस परंपरा को तोड़ दिया था, जिसके तहत पशुपतिनाथ मंदिर में केवल भारतीय पुजारियों को ही पूजा करवाने का अधिकार प्राप्त था।

मंदिर के प्रमुख पुजारी महाबलेश्वर भट्ट और उनके दो सहयोगियों ने माओवादी सरकार के दबाव के चलते इस्तीफा दे दिया था। तात्कालीन प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड ने नेपाल के इतिहास में पहली बार पशुपतिनाथ मंदिर में भारतीय पुजारी के स्थान पर नेपाली पुजारियों को नियुक्त किया था।

प्रचंड के फैसले का उस समय विरोध भी हुआ था लेकिन मई में प्रचंड के सत्ता से बाहर होने के बाद नई गठबंधन सरकार ने एक बार फिर से पुरानी परंपरा को जारी रखने का आदेश दिया था।

पशुपतिनाथ के मुख्य पुजारी के लिए सरकार ने भारतीय राज्य कर्नाटक के गिरीश भट्ट और राघवेन्द्र भट्ट के नाम को हरी झंडी दिखाई थी। बुधवार रात को दोनों पुजारियों को एक गुप्त जगह पर ले जाया गया, जहां तीन रात तक दोनों रहेंगे और मंदिर के नियमों के तहत मांगलिक कार्य संपन्न करने के बाद पुजारी नियुक्त किए जाएंगे।

नेपाल के तीन धार्मिक संगठन सरकार के इस फैसले का विरोध कर रहे हैं। इन संगठनों का नेतृत्व माओवादी कर रहे हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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