कांग्रेस ने अपना एक सितारा खो दिया
हैदराबाद, 3 सितम्बर (आईएएनएस)। जीवन के अंतिम क्षण तक जनता के दुख-दर्द का ख्याल रखने वाले वाई.एस. राजशेखर रेड्डी की मौत लोगों को हमेशा कचोटती रहेगी। आंध्र प्रदेश की जनता के दिलों पर वह राज करते थे और राजनीति उनके लिए सिर्फ जनसेवा का माध्यम भर थी।
उनकी मौत भी ऐसे वक्त हुई जब जनता की पीड़ा की थाह लेने के त्रासद मिशन पर वह निकले। जनता उन्हें कितना चाहती थी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है उन्हें फिर से सरकार की कमान थामने का जनादेश मिला और पूरे राजनीतिक करियर में एक भी बार उन्हें हार का सामना नहीं करना पड़ा।
डाक्टरी के पेशे से राजनीति में प्रवेश करने वाले रेड्डी जनता की पसंद और नापसंद को जानते थे। उन्होंने विरोधी स्वर को अनसुनी करते हुए जन कल्याण के लिए कई क्रांतिकारी योजनाएं शुरू कीं। ये योजनाएं दूसरे राज्यों के लिए भी रोल मॉडल साबित हुईं। निस्संदेह वह राज्य के सर्वाधिक लोकप्रिय नेताओं की जमात में गिने जाते रहेंगे।
इस वर्ष 8 जुलाई को जिंदगी के 60 वें साल को पार करने वाले रेड्डी कुशल प्रशासक और स्वच्छ छवि वाले जुझारू नेता के रूप में याद किए जाते रहेंगे। उनकी लोकप्रियता की तुलना राज्य के दिवंगत मुख्यमंत्री एन.टी रामाराव की लोकप्रियता से की जाती है। अपने करिश्मे पर उन्हें इतना भरोसा था कि उन्हें कभी चुनावी जीत के लिए किसी फिल्मी सितारे की सेवा नहीं लेनी पड़ी और न ही उन्होंने लंबे-चौड़े वादे कर जनता को छलावे में रखा। उनकी कथनी और करनी में फर्क न होना राजनीति के लिए एक दुर्लभ मिसाल है।
यह सही है कि उनके विरोधी उनकी शैली को आक्रामक मानते थे, पर वे भी जनता से समीकरण साधने की उनकी कला के कायल थे। कई जानकारों की राय है कि उनकी मौत से कांग्रेस को जो झटका लगा है, उससे उबरना उसके लिए आसान नहीं होगा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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