प्रधान न्यायाधीश भी आरटीआई के दायरे में : दिल्ली उच्च न्यायालय (राउंडअप)

न्यायाधीश एस. रवींद्र भट्ट ने अपने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि न्यायाधीश जवाबदेह हैं लेकिन उसकी भी कुछ सीमाएं हैं।

न्यायमूर्ति भट्ट ने कहा, "कोई न्यायाधीश गैर जवाबदेह नहीं है जैसा कि कभी-कभी इस बारे में गलत समझा गया है, लेकिन उसकी कई सीमाएं हैं। न्यापालिका के पास लोकतंत्र की अन्य दो स्तंभों की तरह तलवार या धन का पिटारा नहीं है। न्यायाधीशों की मर्यादा लोकतंत्र की प्रतिष्ठा बढ़ाती है। न्यायाधीश लोगों की आलोचना के दायरे में हैं, ऐसे में संपत्ति की घोषणा और अन्य सूचनाएं न्यायाधीशों की प्रतिष्ठा बढ़ा सकती हैं।"

न्यायमूर्ति भट्ट ने जोर देकर कहा कि प्रधान न्यायाधीश का कार्यालय एक सार्वजनिक प्राधिकरण है और यह भी सूचना के अधिकार (आरटीआई) के दायरे में आता है।

उन्होंने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य जन सूचना अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर याची को संपत्ति की घोषणा के बारे में जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।"

दिल्ली उच्च न्यायालय ने 4 मई को सर्वोच्च न्यायालय की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने सीआईसी के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें कहा गया था कि न्यायाधीश संपत्ति की घोषणा करें।

महाधिवक्ता जी.ई. वाहनवती ने न्यायाधीश भट्ट के समक्ष अपनी दलील रखते हुए कहा कि न्यायाधीशों द्वारा अपनी निजी संपत्ति की घोषणा से न्यायिक प्रणाली की स्वतंत्रता बाधित होगी।

वाहनवती ने कहा, "अगर हम एक हद तक पारदर्शिता को शामिल करते हैं तो इससे न्यायाधीशों की कार्यप्रणाली बाधित होगी। इससे न्याय प्रणाली की स्वतंत्रता प्रभावित हो सकती है।"

आरटीआई कानून की सीमा के बारे में दिल्ली उच्च न्यायालय के इस ताजा फैसले का आरटीआई कार्यकर्ताओं ने स्वागत किया है।

आरटीआई कार्यकर्ता सुभाषचंद्र अग्रवाल ने खुशी जाहिर करते हुए कहा, "मैं बेहद उत्साहित हूं। मैं दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश एस.रवींद्र भट्ट को धन्यवाद देना चाहता हूं। उनका फैसला न्यायपालिका में लोगों के विश्वास को बढ़ाएगा। मेरी नजर में तो वह भारत के सर्वश्रेष्ठ न्यायाधीश हैं।"

उल्लेखनीय है कि अग्रवाल के आवेदन के आधार पर ही केंद्रीय सूचना आयोग ने यह निर्णय दिया था कि भारत का मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) भी सार्वजनिक प्राधिकरण है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने रजिस्ट्रार के जरिए उच्च न्यायालय में इस फैसले को चुनौती दी थी, पर फैसला उसके खिलाफ गया है।

सीआईसी के प्रमुख वजाहत हबीबुल्लाह ने फैसले का स्वागत करते हुए अदालत के प्रति आभार प्रकट किया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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