भारत ने पाकिस्तान को उसका आतंकवाद विरोधी संकल्प याद दिलाया (लीड-1)
विदेश मंत्रालय के 100 दिनों के कामकाज पर एक पत्रकार द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में विदेश मंत्री एस.एम.कृष्णा ने कहा, "मुंबई हमले के बाद समग्र बातचीत बंद हो गई थी। हम मानते हैं कि पाकिस्तान के साथ आदान-प्रदान और रिश्ते का सामान्य होना हमारे खास हित में हैं।"
कृष्णा ने कहा, "लेकिन यहीं पर हम बिल्कुल स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि पाकिस्तान के साथ कोई भी अर्थपूर्ण बातचीत इस्लामाबाद द्वारा अपने वादे को पूरा किए जाने पर निर्भर होगी। वादा यह कि वह भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों के लिए अपनी धरती का किसी भी तरह से इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं देगा।"
कृष्णा ने इस्लामाबाद को उसके आतंकवाद विरोधी संकल्प को ऐसे समय में याद दिलाया है, जब भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त शाहिद मलिक ने बुधवार को इस्लामाबाद द्वारा आतंकवाद के खिलाफ की गई 'ठोस कार्रवाइर्' को रेखांकित किया और समग्र बातचीत बहाल करने का भारत से फिर आग्रह किया।
इसके साथ ही मलिक ने कश्मीर मुद्दे को फिर से ताजा करने की कवायद की, जिसे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री यूसुफ रजा गिलानी के बीच 16 जुलाई को शर्म अल-शेख में हुई बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में स्थान नहीं मिल पाया था।
यहां राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय में वरिष्ठ रक्षा व प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए मलिक ने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत बहाली से जम्मू एवं कश्मीर सहित विभिन्न मुद्दों को सुलझाने का एक अच्छा मौका उपलब्ध होगा।
उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया में स्थायी और टिकाऊ शांति का सार यही है।
मलिक ने कहा कि पाकिस्तान आतंकवाद के खात्मे के लिए ठोस कार्रवाई कर रहा है। मलिक ने इस संदर्भ में मुंबई हमले के बाद पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कुछ कदमों को रेखांकित किया।
मलिक ने कहा, "आतंकवाद एक क्षेत्रीय मुद्दा है और इसे एक क्षेत्रीय समाधान की जरूरत है।"
शर्म अल-शेख में जारी हुए संयुक्त बयान का जिक्र करते हुए मलिक ने कहा कि दोनों पक्षों ने स्वीकार किया है कि सभी लंबित मुद्दों पर चर्चा के जरिए आगे बढ़ने का एक मात्र रास्ता बातचीत की बहाली ही है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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