चंद्रयान ने चंद्रमा के कभी पूरी तरह पिघलने की पुष्टि की: वैज्ञानिक

चंद्रयान मिशन से जुड़ीं एक अमेरिकी वैज्ञानिक ने यहां मीडिया को बताया कि चंद्रयान चंद्रमा के कभी पूरी तरह पिघले होने की पुष्टि कर गया है।

अमेरिका के ब्राउन विश्वविद्यालय में नासा से सहयोग प्राप्त स्पेक्ट्रोस्कोपी केंद्र में विज्ञान प्रबंधक एवं वरिष्ठ वैज्ञानिक कार्ले पीटर्स ने यहां संवाददाताओं के साथ एक अनौपचारिक बातचीत में कहा, "चंद्रयान ने यह साबित कर दिया है कि चंद्रमा कभी मैगमा का सैलाब था। यह महज एक धारणा नहीं, हकीकत है।"

पीटर्स चंद्रयान के मून मिनरलॉजी मैपर(चंद्रमा पर मौजूद खनिज का अध्ययन करने वाले यंत्र) द्वारा भेजी गई जानकारियों की विश्लेषक थीं। उन्होंने यहां 'लो कॉस्ट प्लैनेटरी मिशन कांफ्रेंस' के मौके पर पत्रकारों से एक अनौपचारिक बातचीत में यह कहा।

चंद्र पर एनोर्थाइट (ऊपरी चंद्र सतह पर मौजूद ऐसी परत जो कैल्सियम से भरपूर है, पर जिसमें लौहे की मात्रा बेहद कम है) की मौजूदगी को वह अतीत में चांद के पिघले होने का सबूत मानती हैं। उन्होंने कहा जब मैगमा ठंडा हुआ तो एनोर्थाइट ऊपरी सतह पर जम गया। वह इस जानकारी को चांद का इतिहास जानने के प्रयास के लिहाज से अहम मानती हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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