कभी कव्वाल था, अब भजन गाता है रोजन अली

लखनऊ, 2 सितम्बर (आईएएनएस)। रोजन अली गंगा-जमुनी संस्कृति की जीती-जागती मिसाल है। रोजन एक मुस्लिम किसान हैं जो हर सुबह नमाज अदा करने के बाद मंदिरों में भजन गाना नहीं भूलते। उनका कहना है कि ऐसा करके उन्हें बेतहाशा खुशी मिलती है।

वाराणसी के चौबेपुर इलाके के बाशिंदे 55 वर्षीय रोजन कभी कव्वाल हुआ करते थे लेकिन अब वह भजन गाने में पूरी तरह रम गए हैं। उनके इस कदम का शुरू में उनके परिवार और समुदाय के कुछ लोगों ने विरोध किया लेकिन रोजन ने इसकी परवाह नहीं की।

रोजन ने आईएएनएस को फोन पर बताया, "मस्जिद में रोजाना सुबह नमाज पढ़ने के बाद मैं कई मंदिरों में जाता हूं और वहां भजन गाता हूं।"

उनका कहना है, "यह काम करके मुझे बहुत खुशी होती है। मैं अपने अहसास को लफ्जों में बयां नहीं कर सकता। मैं सिर्फ इतना कह सकता हूं कि जब तक मैं भजन गाता हूं तब तक खुद को ऊपर वाले से जुड़ा महसूस करता हूं।"

लगभग 30 वर्ष पहले रोजन ने कव्वाली गाना छोड़ भजन गाने का फैसला किया था। वह कहते हैं, "मैं जब 15 साल का था तभी से अपने पिता के साथ स्टेज पर गाना शुरू कर दिया। उसी दौरान मैं वाराणसी के कुछ युवकों के संपर्क में आया जो भजन गाया करते थे। मैं उन लोगों से बहुत प्रभावित हुआ। मैं उनसे मिलने लगा और हम दोस्त बन गए।"

रोजन ने कहा, "जैसे-जैसे बड़ा हुआ तो मैंने महसूस किया कि भक्ति गीत गाए बिना मैं नहीं रह सकता और 25 साल का होने पर मैंने अपनी इसी चाहत को पूरा करने के लिए भजन गाना शुरू कर दिया।"

अब रोजन अपने 21 वर्षीय बेटे के साथ वाराणसी के संकटा माता, शीतला माता और कई अन्य मंदिरों में भजन गाते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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