विशेषज्ञों को कोपेनहेगन शिखर सम्मेलन की सफलता की उम्मीद
जेनेवा, 1 सितम्बर (आईएएनएस)। कोपेनहेगन में प्रस्तावित बहुचर्चित संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन से पहले यूनाइटेड नेशंस फ्रेमवर्क कन्वेंशन ऑन क्लाइमेट चेंज (यूएनएफसीसीसी) से संबद्ध विशेषज्ञों ने इसके सफल रहने की उम्मीद जताई है।
इस सम्मेलन का आयोजन सात से 18 दिसंबर तक होगा। जलवायु परिवर्तन से निपटने के तौर तरीकों पर विभिन्न देशों के बीच मतभेद उजागर होते रहे हैं। जलवायु परिवर्तन पर अंतर-सरकारी समिति के कार्यालय में संवाददाताओं के साथ एक वीडियो वार्ता में यूएनएफसीसीसी सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमें उम्मीद है कि यह सम्मेलन जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचेगा।
इस सम्मेलन में 2012 के बाद की अवधि में जलवायु परिवर्तन की चुनौती से निपटने के उपायों पर चर्चा होगी। अधिकारी ने अपना नाम जाहिर नहीं किए जाने का अनुरोध करते हुए पत्रकारों को बताया कि इस बार के सम्मेलन से हमें काफी उम्मीदें हैं।
उन्होंने कहा, "बाली में 2007 में हुए सम्मेलन में सदस्य देशों ने कोपेनहेगन सम्मेलन को सफल बनाने का वादा किया था। मुझे उम्मीद है कि सदस्य देश इस वादे को नहीं भूले होंगे। अभी तक किसी भी देश ने वैश्विक जलवायु परिवर्तन के खतरे से निपटने में असहयोग करने की मंशा प्रकट नहीं की है।"
वैसे, उन्होंने इस पर चिंता जताई कि जलवायु परिवर्तन को लेकर जारी समझौतों की गति धीमी है। उन्होंने कहा कि सरकारों और नेताओं को इस मामले में समय की महत्ता समझते हुए समझौतों की गति तेज करनी होगी।
इस बीच यूएनएफसीसीसी के सूत्रों ने बताया है कि कोपेनहेगन समझौते की विफलता के खतरे से निपटने के लिए कोई आपात योजना तैयार नहीं की गई है।
अधिकारी ने कहा कि हमारे पास समय काफी कम रह गया है। जलवायु परिवर्तन की समस्या से हमें युद्ध स्तर पर निपटना होगा। या तो हम हारेंगे या जीतेंगे।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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