गिलगित-बल्तिस्तान को स्वायत्तता की पहल महज मजाक : पाक कश्मीरी नेता
श्रीनगर, 1 सितम्बर (आईएएनएस)। पाकिस्तान सरकार द्वारा अपने कब्जे वाले नॉदर्न एरियाज को गिलगित-बल्तिस्तान के नाम से व्यापक राजनीतिक स्वायत्तता प्रदान करने के लिए की गई पहल को एक अलगाववादी नेता ने महज मजाक करार दिया है।
बीते शनिवार को पाक मंत्रिमंडल ने गिलगित-बल्तिस्तान सशक्तिकरण एवं स्वशासन आदेश, 2009 को अनुमोदित कर स्थानीय विधान सभा को अपना मुख्यमंत्री चुनने का अधिकार दे दिया, जबकि पाकिस्तान का राष्ट्रपति इस क्षेत्र के लिए गवर्नर की नियुक्ति करेगा। पाक के कब्जे वाले कश्मीर के एक अलगाववादी नेता लियाकत हयात इसे महज छलावा मानते हैं।
हयात ने आईएएनएस को ई-मेल जरिए दिए साक्षात्कार में कहा, "हम इसे स्वायत्तता कहे जाने के बिल्कुल खिलाफ हैं। यह कुछ और नहीं बल्कि इस क्षेत्र के लोगों के साथ महज धोखा है।" हयात जम्मू-कश्मीर नेशनल अवामी पार्टी (जेकेएनएपी) के अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि यह न सिर्फ नॉदर्न एरियाज के लोगों, बल्कि पूरे जम्मू-कश्मीर के लोगों के साथ मजाक है। जेकेएनपी मुजफ्फराबाद स्थित एक अलगाववादी पार्टी है जो कश्मीर की आजादी की हिमायती है।
हयात ने कहा कि इस क्षेत्र के लोगों को 63 वर्षो तक बुनियादी मानवाधिकारों से वंचित रखने के बाद सरकार को स्वायत्तता की याद आई है। उन्होंने कहा कि स्थानीय प्रशासन का नाम बदलने और मुख्यमंत्री एवं गवर्नर पदों को सृजित करने के पीछे इस क्षेत्र पर केंद्र की पकड़ मजबूत बनाने का लक्ष्य छिपा है।
शिया मुस्लिम बहुल इस इलाके में अलगाववादी आंदोलन जोर पकड़ता रहा है। निम्न साक्षरता दर, गरीबी, सुविधाओं की किल्लत एवं औद्योगिक पिछड़ापन यहां की पहचान रही है। इससे असंतोष गहरा रहा है।
हयात कहते हैं, "यह पूरी तरह असंवैधानिक फैसला है। पाकिस्तान को यहां के लोगों की नियति का फैसला करने का कोई अधिकार नहीं है। यह संयुक्त राष्ट्र संघ के उस प्रस्ताव का उल्लंघन है जिसमें कहा गया है कि जब तक भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर विवाद का अंत नहीं हो जाता, इस क्षेत्र पर पाक सरकार का अस्थायी नियंत्रण ही रहेगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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