न तो पीएसी की अध्यक्षता छोडूंगा, न ही पार्टी में लौटूंगा : जसवंत (लीड-1)
अपनी किताब 'जिन्ना : भारत-विभाजन के आईने में' पर गुजरात सरकार द्वारा लगाए गए प्रतिबंध पर सर्वोच्च न्यायालय में मंगलवार को हुई सुनवाई के लिए अदालत पहुंचे जसवंत से जब पत्रकारों ने पूछा कि क्या वह पीएसी के अध्यक्ष का पद छोड़कर भाजपा को उपकृत करेंगे, इसके जवाब में उन्होंने कहा, "नहीं।"
जसवंत ने कहा, "मुझे पद छोड़ने के लिए कहना किसी राजनीतिक दल का नहीं बल्कि लोकसभा अध्यक्ष का काम है।"
भाजपा में वापसी के सवाल पर उन्होंने कहा, "भाजपा में वापसी का मेरा कोई इरादा नहीं है। मैंने अपने लिए उसके दरवाजे बंद कर दिए हैं।"
उल्लेखनीय है कि भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने सोमवार को जसवंत से उनके आवास पर मुलाकात की थी। वह जसवंत को पीएसी के अध्यक्ष का पद छोड़ने के लिए मनाने गईं थी। सुषमा की इस मुलाकात को जसवंत की पार्टी में वापसी की संभावनाओं से भी जोड़ा गया।
इधर, भाजपा ने जसवंत के पीएसी अध्यक्ष का पद न छोड़ने के फैसले पर अफसोस जताया है। पार्टी के वरिष्ठ नेता वेंकैया नायडू ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, "उन्हें मालूम होना चाहिए कि पार्टी छोड़ने या पार्टी से निकाले जाने वालों को क्या करना होता है।"
ज्ञात हो कि जसवंत को गत 19 अगस्त को उनकी पुस्तक 'जिन्ना : भारत-विभाजन के आईने में' के विमोचन के दो दिनों बाद ही पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था।
जसवंत के निष्कासन के बाद से ही भाजपा में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को लेकर जबरदस्त उठापटक चल रही है।
जसवंत ने रविवार को आईएएनएस से एक खास बातचीत में कहा था, "भाजपा ध्वस्त होती जा रही है। हर एक दिन गुजरने के साथ उनके नेताओं का विश्वास कम होता जा रहा है। मैं नहीं जानता कि अचानक वहां इतने सवाल क्यों उठ रहे हैं। यह उनकी अक्षमता का दुखद प्रदर्शन है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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