जसवंत की किताब पर प्रतिबंध क्यों : सर्वोच्च न्यायालय (लीड-1)
न्यायमूर्ति अल्तमस कबीर और न्यायमूर्ति सिरिएक जोसेफ की पीठ ने जसवंत की किताब पर लगाए गए प्रतिबंध के सिलसिले में गुजरात सरकार से 8 सितम्बर तक जवाब देने को कहा है। गुजरात सरकार की तरफ से उसके वकील हेमंतिका वाही ने अदालत का नोटिस स्वीकार किया।
जसवंत के वकील फली. एस. नरीमन ने अदालत में कहा कि किताब पर प्रतिबंध लगाना उनके मुवक्किल के मौलिक अधिकारों का हनन है। यह संविधान के अनुच्छेद 19 (2) का उल्लंघन है।
नरीमन ने कहा कि राज्य सरकार के अधिकारियों ने बिना पढ़े ही पुस्तक पर प्रतिबंध का फैसला कर लिया। हालांकि अदालत ने किताब पर से प्रतिबंध हटाने का आदेश देना उचित नहीं समझा और इससे पहले राज्य सरकार का पक्ष जानना चाहा।
गुजरात सरकार ने गत 19 अगस्त को अधिसूचना जारी कर जसवंत की किताब की बिक्री और उसके वितरण पर यह कहते हुए प्रतिबंध लगा दिया था कि किताब के अंश आपत्तिजनक हैं।
राज्य सरकार ने कहा था, "सरकार मानती है कि किताब में जो बातें लिखी गई हैं वह गुमराह करने वाली तथा समाज को बांटने वाली है। यह राज्य के हित में नहीं है।"
जसवंत ने करंजवाला एंड कंपनी की तरफ से दायर अपनी याचिका में कहा था कि उनकी किताब पर प्रतिबंध लगाने का फैसला जल्दबाजी में उठाया गया और मनमानीभरा कदम है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
*


Click it and Unblock the Notifications