वैश्विक मंदी खत्म होने के कगार पर : प्रधानमंत्री (लीड-1)
योजना आयोग की एक पूर्ण बैठक की अध्यक्षता करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, "वैश्विक आर्थिक मंदी के कारण हमने कठिन वर्ष का सामना किया है। आने वाले महीनों में इसमें सुधार की संभावना दिख रही है।"
योजना आयोग के मुख्यालय योजना भवन में प्रधानमंत्री ने कहा कि हालांकि देश में मानूसन की स्थिति ठीक नहीं रही।
उन्होंने कहा, "हमें सूखे से निपटने के लिए जरूरी हर कदम उठाने होंगे, लेकिन हमें घोर निराश होने की जरूरत नहीं है। हम सूखे के प्रभाव से निपटने में पूरी तरह सक्षम है। हमारे पास खाद्यान्न का भंडार काफी ज्यादा है।"
बैठक में वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी, कृषि मंत्री शरद पवार, बिजली मंत्री सुशील कुमार शिंदे और योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया सहित आयोग के सदस्य मौजूद थे।
मनमोहन सिंह ने कहा, "आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा जरूरी है। यह एक ऐसा क्षेत्र हैं जहां हम पिछड़ रहे हैं। हम अपनी जरूरत की पेट्रोलियम ऊर्जा का 70 फीसदी आयात करते हैं और कोयले के मामले में भी कठिन स्थिति का सामना कर रहे हैं।"
उन्होंने कहा, "जलवायु परिवर्तन के खतरे को देखते हुए तर्कसंगत ऊर्जा नीति की जरूरत है। यह एक नई मजबूरी है। हमें मूल्यांकन करने की जरूरत है कि कहां हमारी ऊर्जा नीति में कमी है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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