1968 के विमान हादसे में मरने वालों के शवों की बरामदगी नहीं

यह विमान भारतीय वायु सेना का था। सात फरवरी, 1968 को हुए इस हादसे में चालक दल के छह सदस्यों समेत कुल 102 रक्षाकर्मी मारे गए थे। हादसा उस वक्त हुआ जब वायु सेना का एन-12 विमान चंदरभागा रेंज के डक्का ग्लेशियर के ऊपर 17,400 फीट की ऊंचाई से गुजर रहा था। अभी तक केवल चार शव ही बरामद हो सके हैं।

डोगरा स्काउट्स के मेजर वासुदेवन ने आईएएनएस को फोन पर बताया, "हमें विमान का मलबा नहीं मिला है। लेकिन हमें कुछ अहम संकेत मिले हैं जो भविष्य के अभियानों में हमारे लिए मददगार साबित हो सकते हैं।

अभियान के वक्त मौसम भी काफी प्रतिकूल रहा।" वासुदेवन ने ही इस अभियान का नेतृत्व किया था। इस अभियान में मुख्यत: डोगरा स्काउट्स के पर्वतारोहियों को शामिल किया गया।

शवों की बरामदगी के लिए चलाए गए इस अभियान का नाम 'ऑपरेशन फीनिक्स' रखा गया। पिछले सप्ताह यह बगैर किसी नतीजे के समाप्त हो गया। इससे उन परिवारों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है जो हादसे में मारे गए परिजनों के शव के मिलने का इंतजार कर रहे थे।

वासुदेवन ने कहा कि इस बार पिछले मौसम की तुलना बर्फबारी कम होने के कारण हमने सफलता की उम्मीद लगा रखी थी। पर मौसम का मिजाज अचानक बदल गया। वायुमंडल में आक्सीजन की मात्रा कम हो जाने के कारण अभियान और जोखिम भरा हो गया।

विमान का ब्लैक बॉक्स बरामद नहीं होने की वजह से इस हादसे की वजह का आज तक पता नहीं चल सका।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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