फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला में खाली पदों को भरने का आदेश

नई दिल्ली, 1 सितम्बर (आईएएनएस)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने राजधानी स्थित फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (एफएसएल) में खाली पदों को भरने में हो रही देरी के लिए राज्य सरकार के ढुलमुल रवैये की आलोचना की है।

मुख्य न्यायाधीश अजीत प्रकाश शाह और न्यायमूर्ति मनमोहन की एक खंडपीठ ने सरकार से एफएसएल में कर्मचारियों की नियुक्ति में हो रही देरी के सिलसिले में विस्तृत जवाब मांगा है।

ख्ांडपीठ ने पिछले सप्ताह सरकार से पूछा कि राजधानी में लगातार बढ़ते आपराधिक मामलों के मद्देनजर क्यों कोई कार्रवाई नहीं की गई। अदालत ने कहा, "यह एक गंभीर मामला है और गंभीरता से ही इसका समाधान निकाला जाना चाहिए।"

दिल्ली पुलिस की वकील मुक्ता गुप्ता ने अदालत को सूचित किया था कि मादक पदार्थ नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) के कई मामले अदालत में इसलिए लंबित है क्योंकि पुलिस को एफएसएल की रिपोर्टों का इंतजार है।

गुप्ता ने अदालत को बताया, "एफएसएल में कर्मचारियों की बहुत कमी है। इसलिए जांच प्रक्रिया में देरी हो रही है।"

खंडपीठ ने सरकार से पूछा कि आरोप पत्रों के साथ एफएसएल की रिपोर्ट क्यों नहीं दी जा रही है। अदालत ने सरकार से इस बारे में 16 सितम्बर तक विस्तृत जवाब मांगा। अदालत ने साथ ही विभिन्न अदालतों में दर्ज एनसीबी के मामलों के बारे में भी सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी है।

देश भर की एफएसएल में अपर्याप्त सुविधाओं के संबंध में दायर की गई एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने सरकार को ये आदेश दिए हैं। दिल्ली के रोहिणी इलाके में 1995 में स्थापित की गई एफएसएल में 4000 मामले लंबित हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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