त्रिनिदाद एवं टोबेगो राष्ट्रीय पुरस्कारों को लेकर प्रवासी भारतीयों में असंतोष
पोर्ट ऑफ स्पेन, 1 सितम्बर (आईएएनएस)। त्रिनिदाद एवं टोबेगो में रहने वाले प्रवासी भारतीयों ने इस बार के राष्ट्रीय पुरस्कारों के वितरण में भेदभाव बरते जाने का आरोप लगाया है। कुल 20 विजेताओं में भारतीय मूल के महज तीन लोग ही शामिल हैं।
विपक्ष के नेता बासदेव पांडे ने कहा है कि राष्ट्रीय पुरस्कारों ने अपनी महत्ता खो दी है। उन्होंने कहा कि अगर पुरस्कारों के लिए विजेताओं के चयन में भेदभाव बरता जाएगा तो लोग ऐसे पुरस्कारों का सम्मान क्यों करेंगे? उन्होंने कहा, "यह प्रणाली संरक्षणवाद की नीति को बढ़ावा दे रही है। ऐसे में पूरी प्रणाली को खंगालने की जरूरत है।"
विपक्षी यूनाइटेड नेशनल कांग्रेस (यूएनसी) के उप नेता जैक वार्नर ने कहा कि इस बार विजेताओं की सूची में सिर्फ तीन भारतीय ही हैं, शेष पुरस्कार अफ्रीकी-त्रिनिदादी समुदाय के लोगों को दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि देश की कुल आबादी में भारतीयों की 43 फीसदी भागीदारी होने के बावजूद महज तीन विजेताओं को ही सरकार ढूंढ़ पाई। यह भेदभावपूर्ण है।
वार्नर ने प्रधानमंत्री पैट्रिक मैनिंग की सरकार पर निष्पक्ष नहीं होने का आरोप लगाया। ये पुरस्कार देश के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिए जाते हैं। देश का स्वतंत्रता दिवस 31 अगस्त को मनाया जाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार ऐसे मौके का इस्तेमाल नस्लीय सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए कर सकती थी। उनका मानना है कि इससे समाज में मैत्री की भावना को धक्का पहुंचेगा और भारतीयों में यह संदेश जाएगा कि यह सरकार उनकी परवाह नहीं करती। नेशनल काउंसिल ऑफ इंडियन कल्चर (एनआईसीसी) के देउकीनेनन शर्मा ने विजेताओं के चयन की प्रक्रिया पर सवाल खड़ा किया है। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया पारदर्शी मालूम नहीं पड़ती। शर्मा ने सरकार के इस रवैये को दुखद करार देते हुए कहा कि निश्चित तौर पर इससे भारतीय मूल के लोगों में गलत संदेश जाएगा, जो देश हित में नहीं है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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