यौन उत्पीड़न के संबंधी निर्देशों की अनदेखी कर रही है सेना?
नई दिल्ली,31 अगस्त (आईएएनएस)। भारतीय सेना यौन उत्पीड़न संबंधी आरोपों की जांच आर्मी एक्ट के तहत करती है। ऐसे में अधिकारवादी कार्यकर्ता यह प्रश्न पूछ रहे हैं कि क्या सेना कार्यस्थलों पर महिलाओं के यौन शोषण संबंधी सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों की अनदेखी नहीं कर रही है?
भारतीय सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम गुप्त रखने की शर्त पर आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "यह सही है कि हम इस मामले में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करते। सेना का सदस्य सबसे पहले आर्मी एक्ट के दायरे में आता है और हम यौन उत्पीड़न मामलों ेको गंभीरता से लेते रहे हैं। आर्मी एक्ट इस मामले में सख्त है।"
भारतीय सेना के शीर्ष विधि अधिकारी रह चुके मेजर जनरल नीलेंद्र कुमार कहते हैं, "सेना की यह नीति रही है कि हर गंभीर मामले की सुनवाई सैन्य अदालत में हो। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देश सेना पर लागू नहीं हैं, क्योंकि पहले से ही आर्मी एक्ट अमल में है।"
एक गैर-सरकारी संगठन गार्डियन फाउंडेशन के प्रमुख के.पी.एस सथीश कहते हैं, "सुप्रीम कोर्ट के इन दिशा-निर्देशों के दायरे में देश के सभी कार्यस्थल आते हैं। ऐसे में इसका अनुपालन हर कार्यस्थल पर होना चाहिए।" उल्लेखनीय है जिस वक्त आर्मी एक्ट-1950 लागू किया गया था, सेना में महिलाओं के प्रवेश की परिपाटी नहीं थी। सथीश पूछते हैं कि जब उस वक्त सेना में महिलाएं थीं ही नहीं तो इस कानून को महिलाओं का यौन शोषण रोकने के मामले में कारगर कैसे माना जा सकता है? संगठन ने सेना के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग में एक शिकायत दर्ज कराई है, जिसमें कहा गया है कि सेना अदालती निर्देशों का उल्लंघन कर रही है। सेना को इन दिशा-निर्देशों के दायरे में लाया चाहिए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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