बिहार में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल पांचवें दिन भी जारी, हड़ताल अवैध घोषित (लीड-1)

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव सी़ के मिश्रा ने सोमवार को बताया कि बिना छुट्टी के अनुपस्थित रहने वाले जूनियर डॉक्टरों पर कार्रवाई का निर्देश अस्पताल प्रशासन को दे दिया गया है। उन्होंने बताया कि ड्यूटी से गायब रहने वाले जूनियर डॉक्टरों के गायब रहने के कारण चिकित्सा व्यवस्था को प्रभावित नहीं होने दी जायेगी। उन्होंने बताया कि पीएमसीएच में जरूरत पड़ी तो अनुबंध पर चिकित्सकों की नियुक्ति की जायेगी।

सरकार का मानना है कि जूनियर डॉक्टर बिना किसी नोटिस के कार्य से अनुपस्थित हैं जो असंवैधानिक है।

इधर, पीएमसीएच और अस्पताल प्रषासन के बीच सोमवार को हुई वार्ता एक बार फिर विफल हो गई। छात्र नेताओं का मानना है कि सरकार अगर दबाव की रणनीति बनाएगी तो वे सामूहिक इस्तीफा दे देंगे।

पीएमसीएच और डीएमसीएच में हड़ताल के दौरान अब तक 42 लोगों की मौत हो गई है। हालांकि अस्पताल प्रशासन नहीं मानता कि ये मौतें हड़ताल के कारण ही हुई हैं। स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक पीएमसीएच में पिछले चार दिनों में 36 लोगों की तथा डीएमसीएच में छह लोगों की मौत हो चुकी है। अधिकारी के मुताबिक हड़ताल चलते रहने के बाद स्थिति और बिगड़ने की आशंका है।

पारिश्रमिक में वृद्घि एवं वेतन की मांग को लेकर दोनों अस्पतालों के करीब 800 से ज्यादा जूनियर डॉक्टर बुधवार के शाम से हड़ताल पर चले गए हैं। हड़ताल का सबसे अधिक प्रभाव आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है। पीएमसीएच के एक वरिष्ठ चिकित्सक का मानना है कि यहां आने वाले अधिकांश मरीज अब निजी अस्पतालों में जाने लगे हैं।

इधर, जूनियर डॉक्टर के संघ के अध्यक्ष राजीव बाबू ने सोमवार को बताया कि हमलोग शांतिपूर्वक हड़ताल पर हैं, परंतु हमारी मांगें जब तक पूरी नहीं की जाएंगी तब तक हड़ताल वापस लेने का प्रश्न ही नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि अब तक न तो मंत्री और न ही किसी अधिकारी ने हमसे संपर्क किया है।

एक अन्य नेता का कहना है कि वेतन में वृद्घि की मांग पिछले दो वर्ष से की जा रही है लेकिन अब तक इस पर कोई भी फैसला लिखित रूप से नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि पीएमसीएच में प्रथम वर्ष के छात्र को 13,000 रुपए, द्वितीय वर्ष के छात्र को 14,000 रुपए और तृतीय वर्ष के छात्र को 15,000 रुपए दिए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि हमारी मांग पड़ोसी राज्य की तरह यहां भी वेतन बढ़ाकर 22,500 रुपए करने की है। इधर, पीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक डॉ़ आऱ क़े सिंह ने बताया कि हड़ताल के कारण मरीजों की मौत नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में 48 डॉक्टरों के योगदान देने से आपातकालीन सेवाओं में भर्ती मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज हो रहा है।

हड़ताल के कारण पीएमसीएच में ऑपरेशन भी लगभग बंद हो गया है। इधर, एक अन्य वरिष्ठ चिकित्सक का कहना है कि बिना जूनियर डॉक्टरों के सहयोग के बिना ऑपरेशन प्रारंभ नहीं किए जा सकते हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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