बिहार में जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल से चिकित्सा व्यवस्था चरमराई (लीड-1)
स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के मुताबिक पीएमसीएच में पिछले चार दिनों में 36 मरीजों की और डीएमसीएच में छह की मौत हो चुकी है। अधिकारी के मुताबिक हड़ताल जारी रहने से स्थिति और बिगड़ने की आशंका है। राज्य सरकार ने हड़ताल पर गए डॉक्टरों को नोटिस जारी कर कहा है कि यदि वे काम पर नहीं लौटे तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
पारिश्रमिक में वृद्घि एवं वेतन की मांग को लेकर दोनों अस्पतालों के करीब 800 से ज्यादा जूनियर डॉक्टर बुधवार शाम से हड़ताल पर हैं। हड़ताल का सबसे अधिक प्रभाव आपातकालीन सेवाओं पर पड़ रहा है। पीएमसीएच के एक वरिष्ठ चिकित्सक का मानना है कि यहां आने वाले अधिकांश मरीज अब निजी अस्पतालों में जाने लगे हैं।
जूनियर डॉक्टर संघ के अध्यक्ष राजीव बाबू ने सोमवार को बताया, "हमलोग शांतिपूर्वक हड़ताल पर हैं। हमारी मांगें जब तक पूरी नहीं होंगी तब तक हड़ताल खत्म करने का प्रश्न ही नहीं उठता। अब तक न मंत्री और न ही किसी अधिकारी ने हमसे संपर्क किया है।"
पीएमसीएच के अस्पताल अधीक्षक आऱ क़े सिंह ने स्पष्ट किया कि हड़ताल के कारण मरीजों की मौत नहीं हो रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में 48 डॉक्टरों के योगदान से आपातकालीन सेवाओं में भर्ती मरीजों का बेहतर ढंग से इलाज हो रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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