बेमिसाल है तालिबान की गिरफ्त से आजाद पश्तो गायक
लंदन, 31 अगस्त (आईएएनएस)। बीबीसी वेबसाइट द्वारा जारी ब्रिटेन की 10 सर्वाधिक गुमनाम प्रसिद्ध हस्तियों की सूची में शामिल लतीफ नंगारहारी की कामयाबी की कहानी दूसरों के लिए प्रेरक है।
तालिबान की पकड़ से मुक्त होकर लंदन पहुंचकर संगीत की दुनिया में खास मुकाम हासिल करने तक का उनका सफर किसी नाटकीय फिल्म की कहानी से कम दिलचस्प नहीं है।
ब्रिटिश पासपोर्ट धारक लतीफ अपने मुल्क अफगानिस्तान की संगीत बिरादरी के हीरो हैं। नांगरहार प्रांत की राजधानी जलालाबाद के रहने वाले लतीफ के संगीत प्रेम से खफा होकर वर्ष 2000 में तालिबान ने उन्हें पकड़ लिया। बगैर उस्ताद के संगीत सीखने वाले लतीफ कहते हैं, "अल्लाह का शुक्र है कि उन्होंेने मेरी जीभ नहीं काटी। मेरे चाचा ने मुझे तालिबान की गिरफ्त से मुक्त कराकर पाकिस्तान भागने में मदद दी। फिर मैं एक एजेंट को 19,000 डॉलर चुकाकर ब्रिटेन आ गया। "
ब्रिटेन में उन्होंने लंदन परिवहन विभाग में बतौर बस चालक काम किया। संगीत के प्रति जुनून ने उन्हें यह काम छोड़कर पूरी तरह गायन करियर अपनाने को प्रेरित किया। उनकी लगन काम आई। इसी महीने बीबीसी ने उन्हें ब्रिटेन की ऐसी 10 हस्तियों की सूची में शामिल किया जिनके बारे में लोगों ने इससे पहले कभी नहीं सुना। दिलचस्प बात यह है कि इस सितारे को खुद इसके बारे में तब पता चला जब आईएएनएस ने उन्हें इससे अवगत कराया।
उनके पहले एलबम 'राशा गुले राशा' ने अफगानी संगीत दुनिया में तहलका मचा दिया और वे रातोंरात स्टार हो गये। दुबई में अपना बेहद सफल संगीत कार्यक्रम पेश कर वापस लौटे लतीफ कहते हैं, "मेरा संगीत शांति और प्यार का संदेश देता है जो अफगानियों के जख्मी दिल पर मरहम का काम करता है।" वह आस्ट्रेलिया, यूरोप, स्कैंडिनेवियाई देशों, मध्य पूर्व के दशों में कार्यक्रम पेश कर चुके हैं।
अपने मुल्क में वह कितने लोकप्रिय हैं इसका अंदाजा इसी लगाया जा सकता है कि इस बार के चुनाव में राष्ट्रपति हामिद करजई समेत कई नेताओं ने उनका इस्तेमाल किया। हाल ही में काबुल में उन्हें मार्केटिंग करते देख इतनी भीड़ जुटी कि पुलिस को ताकत का इस्तेमाल करना पड़ा।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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