भारतीय महिलाओं का बढ़ रहा है लेखन की ओर झुकाव
नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। आप उनकी पुस्तकों को साहित्यिक बहस में उद्धृत कर सकते हैं या अपनी बात मजबूती से रखने के लिए इन रचनाओं के अंशों को बतौर उदाहरण पेश कर सकते हैं। ऐसी पुस्तकों की रचनाकार वे महिलाएं हैं जिन पर गृहस्थी चलाने से लेकर बच्चों के लालन-पालन तक का दायित्व है। भारतीय महिलाओं में इन दिनों लेखन का क्रेज जोर पकड़ रहा है।
महिलाओं पर इन दिनों घर-गृहस्थी चलाने के अनुभवों या अपने बच्चों की शरारत भरी जजबाती दुनिया पर केंद्रित पुस्तकें लिखने का जुनून है। उदाहरण के लिए शेफाली साबेरी को ही लें। वह एक रोचक पुस्तक 'इट्स ए मॉम!' की लेखिका हैं। दो वर्ष पहले प्रकाशित हुई यह पुस्तक पाठकों की पसंद बनी हुई है। इस पुस्तक में उन्होंने पहली बार मां बनने के अनुभव को जगह दी है।
सेफाली कहती हैं, "अपनी पहली संतान को दुनिया में लाने का अनुभव अद्भुत होता है। दुनिया पूरी तरह बदली सी नजर आती है। थकावट, सावधानी, रतजगा, खान-पान में बेहिसाब परहेज, दर्द, और न जाने किस-किस दौर से मां को गुजरना पड़ता है। मेरी पुस्तक एक आदर्श गाइड है।" उनकी पुस्तक को पेंग्विन ने प्रकाशित किया।
इसी तरह पारुल शर्मा ने 'ब्रिगिंग अप वसु : दैट फर्स्ट ईयर' नामक पुस्तक में अपनी संतान के लालन-पालन की उन चुनौतियों की चर्चा की हैं, जिनसे उन्हें और उनके पति को जूझना पड़ा।
वैसे, सुजोयिता घोष की पुस्तक 'द हेयर स्केयर' लीक से थोड़ी हटकर है। उन्होंने अपने नौ वर्षीय पुत्र से प्रेरित होकर यह बाल पुस्तक लिखी है। घोष इस संवाददाता से बातचीत करते हुए कहती हैं, "इस कहानी की प्रेरणा मेरा पुत्र है। एक दिन मैं उसे स्कूल के लिए तैयार कर रही थी। मैंने उससे बाल कटवाने को कहा, जिसे वह दो सप्ताहों से टालता आ रहा था। उसने एक बार फिर मेरी गुजारिश खारिज कर दी। उसे मनाने के लिए मैंने उससे कहा कि अगर बाल नहीं कटवाओगे तो कोयल तुम्हारे बाल में घोंसला बना लेगी। यह किताब इसी तरह के रोचक संवाद पर आधारित है।"
उनकी तरह कई महिलाएं पुस्तक लिखने में या तो व्यस्त हैं या लेखिका बन गई हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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