पोखरण-2 परीक्षणों पर विवाद अनावश्यक : प्रधानमंत्री (राउंडअप)

उन्होंने पोखरण में हुए परमाणु परीक्षणों के सफल होने के बारे में पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे.अब्दुल कलाम के बयान का हवाला दिया।

सिंह ने संवाददाताओं से कहा, "कुछ वैज्ञानिकों ने गलत प्रभाव छोड़ा है। पोखरण परीक्षणों पर अनावश्यक विवाद पैदा किया गया है।"

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के परमाणु कार्यक्रम का नेतृत्व करने वाले कलाम ने स्पष्ट कर दिया है कि पोखरण-2 परीक्षण सफल रहे थे।

रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) के वैज्ञानिक के. संथानम के पोखरण-2 परमाणु परीक्षणों के विफल रहने के दावे पर बाड़मेर से 20 किलोमीटर दूर रामसर में राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना शिविर के दौरे के दौरान टिप्पणी करते हुए प्रधानमंत्री ने पत्रकारों से यह बात कही।

उल्लेखनीय है कि डीआरडीओ के पूर्व महानिदेशक कलाम ने कहा था कि परीक्षण सफल थे और इसे आंकड़ों से सिद्ध किया गया था।

परमाणु ऊर्जा आयोग के प्रमुख अनिल काकोडकर ने भी कहा था कि परीक्षणों से 100 प्रतिशत इच्छित परिणाम हासिल हुआ था।

पिछले दो दशकों में खोजे गए सबसे बड़े मंगला तेल क्षेत्र के शुभारंभ के अवसर पर सिंह ने बाड़मेर में कहा, "केयर्न के योगदान से यह प्रदर्शित हो सका है कि भारत में निवेश का काफी अच्छा माहौल है।"

सिंह ने कहा कि तेल कंपनी केयर्न की सफलता की कहानी ने भारत को विदेशी निवेश के उत्कृष्ट स्थान के रूप में प्रदर्शित किया है।

विदेशी निवेशकों से भारत में उपलब्ध संभावनाओं का लाभ उठाने के लिए यहां आने का आग्रह करते हुए सिंह ने कहा, " मैं दुनिया के विभिन्न हिस्सों से निवेशकों को यहां आने का आग्रह करता हूं और भारत सरकार से सभी सुविधाएं और समर्थन देने का आश्वासन देता हूं।"

सिंह ने नेपथ्य में बजते आस्कर पुरस्कार विजेता गीत 'जय हो' के साथ मंगला तेल क्षेत्र का उद्घाटन किया। उनको तेल क्षेत्र से निकली तेल की पहली बूंद भी कंटेनर में दी गई।

उन्होंने कहा कि इससे राजस्थान में भारी समृद्धि आएगी।

सिंह ने कहा, "यह ऐतिहासिक तथ्य है कि देश में जहां भी तेल पाया गया है,वहां बहुत तेजी से विकास हुआ है। मेरा विश्वास है कि यहां तेल उत्पादन आरंभ होने के बाद एक नया राजस्थान होगा जहां गरीब और बेरोजगारी नहीं होगी।"

उन्होंने कहा कि देश तीव्र गति से प्रगति कर रहा है और इस गति के कारण ऊर्जा की बढ़ती मांग को पूरा करना पड़ेगा।

सिंह ने कम मानसून के कारण देश के कई हिस्सों के सूखे की चपेट में आने का भी उल्लेख किया।

सिंह ने कहा, "मुझे मालूम है कि राजस्थान सहित देश के कई क्षेत्र सूखे से प्रभावित हैं। मैं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और राज्य के लोगों को आश्वस्त करना चाहूंगा कि केंद्र सरकार, राज्य सरकार के साथ है और वर्तमान समस्याओं को हल करने के लिए हर संभव प्रयास करेगी।"

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री मुरली देवड़ा और राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी समारोह के दौरान उपस्थित थे।

मंगला क्षेत्र में वर्ष 2010 के मध्य में तेल उत्पादन अपने सर्वोच्च स्तर 125,000 बैरल प्रतिदिन पर पहुंच जाएगा।

प्रधानमंत्री ने राजस्थान के सूखा प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण भी किया।

उल्लेखनीय है कि राजस्थान सरकार ने राज्य के 33 में से 26 जिलों को सूखा प्रभावित घोषित कर दिया है और राष्ट्रीय आपात आपदा कोष से 12,690 करोड़ रुपयों की मांग की है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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