मौखिक भाव-भंगिमाओं को शब्दों में तब्दील करने वाला कैमरा तैयार
टोरंटो, 29 अगस्त (आईएएनएस)। बोलने में असमर्थ लोगों के लिए खुशखबरी है। कनाडा के एक वैज्ञानिक ने मूक लोगों की भाव-भंगिमाओं को शाब्दिक अभिव्यक्ति में तब्दील करने वाले कैमरे के विकास में बड़ी सफलता हासिल करने का दावा किया है। यह कैमरा मुंह की हरकतों को शब्दों में तब्दील कर सकता है।
टोरंटो विश्वविद्यालय में ब्लरव्यू रिसर्च इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिक प्रो टॉम चाउ के मुताबिक इंफ्रारेड थर्मोग्राफी मूक लोगों या बोलने में असमर्थ लोगों के लिए शाब्दिक अभिव्यक्ति में मददगार साबित हो सकती है। इंफ्रारेड थर्मोग्राफी का मतलब है किसी वस्तु की सतह से निकली ऊष्मा या विकिरण की माप। इंसान जब बोलता है तो उसके मुंह से ऊष्मा निकलती है।
विशेष लेंस से लैस इंफ्रारेड कैमरे इस विकिरण सा ऊष्मा को कैद कर सकते हैं और इसे इंफ्रारेड डिटेक्टर की मदद से शब्दों में पिरो सकते हैं। इस ईजाद के तहत चाउ ने मुंह के खुलने और बंद होने के साथ होने वाले ऊष्मा परिवर्तन पर खास ध्यान दिया। उनका कहना है कि मुंह का खुलना और बंद होना किसी स्विच की तरह है। इस स्विच की मदद से ऑन-स्क्रीन की-बोर्ड से शब्द चुनने या पिक्चर कम्युनिकेशन बोर्ड से ऐसी तस्वीरें चुनने में मदद मिल सकती हैं जो शब्दों में ढल सके।
उन्होंने बताया कि प्रयोगशाला में कैमरे को रोगी पर केंद्रित किया जाता है, जबकि रोगी कंप्यूटर के सामने बैठता है। जब-जब वह किसी शब्द की ओर संकेत करता है, उसका मुंह खुलता है और कैमरा इस भंगिमा को कैद कर लेता है। उन्होंने एक वाकये की चर्चा करते हुए बताया कि कुछ सप्ताह पहले एक मूक व्यक्ति को उनकी प्रयोगशाला में लाया गया। उसकी मौखिक भंगिमा को कैमरे ने कैद कर लिया। जब इस भंगिमा को शब्द ूमें परिवर्तित किया गया तो वहां खड़ी उसकी मां की आंखों से आंसू झरने लगे। उसकी असमर्थ जुबान ने म-द-र (मां) शब्द कहा था। कंप्यूटर स्क्रीन पर यह शब्द कौंध पड़ा। यह पहला मौका था जब वह एक शब्द बोल पाया।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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