प्ांचायती राज में आधी आबादी की भागीदारी सिर्फ कागजों पर रहने का खतरा

केन्द्र की संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण देने का निर्णय लिया है। मध्य प्रदेश सरकार पहले ही इस तरह का फैसला ले चुकी है। मई 2007 में विधानसभा में पारित किए गए अधिनियम के मुताबिक दिसंबर 2009 में होने वाले पंचायतों के चुनाव में 50 प्रतिशत पद महिलाओं के लिए आरक्षित रहेंगे।

प्रदेश में जिला पंचायत अध्यक्षों के 50, जनपद पंचायत अध्यक्षों के 313 और सरपंचों के 23031 पद हैं। सहायक संचालक पंचायत महेन्द्र श्रीवास्तव ने आईएएनएस को बताया है कि आगामी चुनाव में पदों की संख्या में कुछ तब्दीली भी हो सकती है।

प्रदेश में कई पंचायतों की सरपंच और अन्य पदों पर महिलाएं है, मगर पद की कमान उनके पुरुष रिश्तेदारों के हाथ में है। जब महिला पंचायत प्रतिनिधि अपनी मर्जी के मुताबिक काम करती है तो उसे मुसीबतों का सामना करना पड़ता है। छतरपुर जिले की विक्रमपुरा की सरपंच गुदियाबाई अहिरवार तो अपने गांव तक में इसलिए नहीं रह पा रही है क्योंकि वह गांव के प्रभावशाली लोगों की इच्छा के अनुरुप काम करने को तैयार नही है।

प्रदेश के पंचायत मंत्री गोपाल भार्गव ने आईएएनएस से चर्चा करते हुए स्वीकारा है कि कई इलाकों से उन तक भी इस तरह की शिकायतें आती है कि सरपंच का पति अथवा अन्य रिश्तेदार सरपंची चला रहा है। इसके बावजूद वे कहते है कि मध्य प्रदेश सरकार ने दो साल पहले ही पंचायतों में 50 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण देने का फैसला ले लिया था। अब केन्द्र ने राज्य के इस कदम को अपनाया है।

भार्गव कहते हैं कि इस निर्णय से महिला सशक्तिकरण को बल मिलेगा। साथ ही उनकी ओर से यह प्रयास किए जाएंगे की पंचायतों की कमान महिलाओं के ही हाथ में रहें।

रीवा जिला पंचायात की अध्यक्ष बबीता साकेत कहती हैं कि महिला प्रतिनिधियों के काम में सबसे ज्यादा बाधा प्रशासनिक अधिकारी ही खड़ी करते है। वे इसकी वजह महिलाओं में अशिक्षा और पिछड़ेपन को मानती है। उनका अनुभव है कि महिलाएं मुश्किल से ही अपनी इच्छा के मुताबिक जन-विकास के काम करा पाती है ।

भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता उमाशंकर गुप्ता का कहना है कि केन्द्र सरकार ने मध्य प्रदेश की पहल को अपनाया है। 50 प्रतिशत महिलाओं के उम्मीदवारी के सवाल पर वे कहते है कि चुनाव लड़ने की इच्छा रखने वाली तो 100 प्रतिशत महिलाएं मिल जाएंगी। साथ मे उन्हें यह स्वीकारने में भी हिचक नहीं है कि योग्य महिला उम्मीदवारों की खोज में कुछ दिक्कतें जरुर आएगी।

प्रदेश कांग्रेस के प्रवक्ता क़े के. मिश्रा केन्द्र सरकार के इस फैसले को राजीव गांधी के प्रति सच्ची श्रद्घांजलि बताते हैं। उनका कहना है कि सत्ता के विकेन्द्रीकरण से महिलाओं की बराबरी की भागीदारी हुई है जिसके राजीव गांधी पक्षधर थे। महिलाओं की उम्मीदवारी के संदर्भ में उनका कहना है कि राजनीति में रुचि रखने वाले परिवारों के पुरुष ही महिलाओं को चुनाव लड़ने के लिए आगे लाएंगे।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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