इस्तीफे के लिए वसुंधरा ने रखी शर्तें

राजे की पहली शर्त यह है कि उनके बाद नेता प्रतिपक्ष उनकी पसंद के विधायक को ही बनाया जाए। इसके अलावा विधायक राजेंद्र सिंह राठौर व ज्ञानदेव आहूजा का निलंबन रद्द कर दिया जाए और साथ ही राजे को राष्ट्रीय स्तर पर पदस्थापित किया जाए।
जबकि राष्ट्रीय नेतृत्व राजे की केवल दूसरी शर्त मानने को तैयार हुआ है जिसके अनुसार निलंबित विधायकों के खेद प्रकट करने पर उनके निलंबन को रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा राजे पक्ष के विधायक को नेता प्रतिपक्ष बनाने और राजे को राष्ट्रीय स्तर पर पदस्थापित करने पर पार्टी में आम सहमति नहीं बन पाई।
इन्हीं समीकरणों के चलते आगामी विधानसभा सत्र तक राजे को नेता प्रतिपक्ष बने रहने की अनुमति मिल गई है। साथ ही उनके समर्थक विधायकों के खिलाफ गाज गिरने पर अघोषित रोक लग गई।
दूसरी ओर, राजे ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध रखी है। हालांकि वे पार्टी को बता चुकी हैं कि विधानसभा सत्र के तुरंत बाद इस्तीफे की औपचारिक घोषणा की जा सकती है।


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