अब संस्कृत की पढ़ाई को भी इंटरनेट का सहारा
लखनऊ, 27 अगस्त (आईएएनएस)। अधिकांश भारतीय भाषाओं की जननी देव भाषा संस्कृत भी इंटरनेट क्रांति से लाभान्वित होने जा रही है। चंद हजार लोगों की जुबान तक सिमट चुकी इस भाषा के शिक्षकों ने संस्कृत पढ़ाई का एक सरल ऑनलाइल मॉडल तैयार किया है। इंटरनेट के जरिए इस भाषा को आसानी से सीखा जा सकेगा।
सम विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान के लखनऊ परिसर के प्राचार्य सर्वनारायण झा ने आईएएनएस को साक्षात्कार में कहा, "यह संस्कृत का प्रचार-प्रसार करने और उसकी पढ़ाई को लोकप्रिय बनाने का प्रयास है। संस्थान और इसके विभिन्न परिसरों ने ऑनलाइन संस्कृत पढ़ाई से जुड़ी परियोजना को गंभीरता से लिया है।"
उन्होंने बताया कि मॉडल को इस तरह तैयार किया गया है कि कोई भी व्यक्ति खुद ऑनलाइन इसकी पढ़ाई कर सके। वह कहते हैं, "इसके लिए किसी शिक्षक की जरूरत नहीं है। आप खुद ही संस्कृत का अध्ययन कर सकते हैं। इसके लिए छात्र की संस्कृत भाषा की पृष्ठभूमि होना जरूरी नहीं है।"
उनके मुताबिक दो महीनों के भीतर यह ऑनलाइन कोर्स शुरू हो जाएगा। झा बताते हैं, "शुरू में लोगों को रोजाना की गतिविधियों के बारे में संस्कृत में वाक्य बनाने का तरीका सिखाया जाएगा। इसके बाद उन्हें अभ्यास के जरिए इस भाषा में पूरी तरह सहज बना दिया जाएगा।"
उनके मुताबिक इस ऑनलाइन कोर्स में संस्कृत के जाने-माने लेखकों की पुस्तकें शामिल की जाएंगी। उन्होंने बताया कि इंटरनेट पर संस्कृत की पुस्तकें शायद ही उपलब्ध हैं। हम अपनी प्रस्तावित वेबसाइट में इसकी भी व्यवस्था करेंगे। वह आगे कहते हैं,"हम वाल्मीकि, वेद व्यास, कालिदास आदि की पुस्तकें इस साइट पर उपलब्ध कराएंगे।"
उन्हें उम्मीद है कि यह पोर्टल संस्कृत की लोकप्रियता बढ़ाने में मदद देगा। लखनऊ विश्वविद्यालय में संस्कृत विभाग के प्रमुख ओम प्रकाश पांडेय कहते हैं, "यह परियोजना वाकई सराहनीय है और निश्चित तौर पर न सिर्फ भारत बल्कि दूसरे देशों में भी इसे सराहना मिलेगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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