महिलाओं के प्रति नजरिए में बदलाव भी जरूरी
सामाजिक कार्यकर्ता आरती पांडे का कहना है कि महिलाओं को पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण देने के फैसले से एक बात तो साफ हो गई है कि सरकार भी महिलाओं का दर्जा बराबरी का मानती है। महिला पंचायत प्रतिनिधियों की वर्तमान स्थिति का जिक्र करते हुए वह कहती हैं कि 70 से 75 प्रतिशत पंचायतें तो महिला सरपंचों के पति चला रहे हैं। आज महिला पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देने और समाज में महिलाओं के प्रति नजरिया बदलने की आवश्यकता है।
भोजन के अधिकार अभियान की रोली शिवहरे का मानना है कि सरकार को महिलाओं को आरक्षण देने के लिए आगे भी पहल करनी होगी। वे कहती हैं कि मध्य प्रदेश में महिलाओं ने पंचायतों में अच्छा काम किया है और केन्द्र सरकार के फैसले से पूरे देश में महिलाएं अपनी क्षमता दिखाने में सफल होंगी। लोकसभा में महिलाओं को आरक्षण दिए जाने का बिल डेढ़ दशक से लंबित होने पर शिवहरे ने चिंता जताई।
रीवा जिला पंचायत की अध्यक्ष बबीता साकेत केन्द्र सरकार के फैसले को सही कदम मानतीं हैं। उनका कहना है कि प्रशासनिक व्यवस्था महिलाओं के लिए बाधा खड़ी करती है। महिलाओं को प्रशिक्षण देकर उनके अधिकार बताना भी आवश्यक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


Click it and Unblock the Notifications