गोर्शकोव की बढ़ी कीमत का निपटारा दो दिनों में : नौसेना प्रमुख
नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट में इस पोत के सौदे की कमियों को उजागर करने के बाद से गोर्शकोव के अंतिम मूल्य के निर्धारण की गति धीमी हो गई थी।
विमानवाहक पोत की कीमतों पर सौदेबाजी करने के लिए रूस का एक प्रतिनिधिमंडल देश में आया है।
मेहता ने संवाददाताओं को बताया, "कीमतों पर सौदेबाजी जारी है। समय कम है। आशा है कि कल के बाद ही यह तय हो सकता है।"
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2004 में हुए सौदे के समय भारत को विमानवाहक पोत के लिए 1.5 अरब डॉलर का भुगतान करना था। 94.8 करोड़ डॉलर पोत की मरम्मत पर और बाकी धन इस पर तैनात किए जाने वाले मिग-29 लड़ाकू विमानों और कामोव लड़ाकू हेलीकाप्टरों पर खर्च होना था।
वर्ष 2007 से रूस ने मरम्मत में खर्च अधिक आने का हवाला देते हुए पोत की कीमत बढ़ा दी। सूत्रों के अनुसार अब रूस 2.2 अरब डॉलर से 2.9 अरब डॉलर के बीच रकम की मांग कर रहा है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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