पंचायत में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण (लीड-1)
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने गुरुवार को सभी ग्राम पंचायतों में महिलाओं के लिए 50 प्रतिशत सीटें आरक्षित करने का फैसला किया। इस संबंध में सरकार संसद के शीतकालीन सत्र में विधेयक पेश कर सकती है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में हुए इस फैसले की जानकरी सार्वजनिक करते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने कहा, "पंचायतों में सभी स्तरों पर महिलाओं के लिए 50 फीसदी सीटें आरक्षित करने के लिए मंत्रिमंडल ने संविधान के अनुच्छेद 243 डी में संशोधन को मंजूरी दे दी है।"
उन्होंने कहा, "पंचायतों में महिलाओं के लिए बढ़ाए गए आरक्षण के दायरे से उन्हें सार्वजनिक जीवन में प्रवेश करने की प्रेरणा मिलेगी। इससे महिलाओं के सशक्तिकरण को और मजबूती मिलेगी।"
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान इस संबंध में विधेयक पेश किया जा सकता है।
राष्ट्रपति प्रतिभा देवीसिंह पाटिल ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त अधिवेशन को संबोधित करते हुए सरकार की प्राथमिकताएं गिनाते हुए पंचायत में महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण देने की बात कही थी।
राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने केंद्र सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है। एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने पत्रकारों से चर्चा में कहा, "कैबिनेट के इस फैसले से हम बहुत खुश हैं।"
उन्होंने कहा, "महिलाओं को घर से लेकर संसद तक भेदभाव का सामना करना पड़ता है। उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।"
गौरतलब है कि संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने संबंधी एक विधेयक कुछ क्षेत्रीय दलों के विरोध के कारण लंबे समय से लटका पड़ा है। वर्तमान में देश की लगभग 30 लाख पंचायतों में 36.87 फीसदी महिला सदस्य हैं। प्रस्तावित विधेयक यदि पारित हो जाता है तो इसमें महिला सदस्यों की संख्या 14 लाख से अधिक हो जाएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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