विदेश व्यापार नीति के प्रमुख बिंदु
-पासबुक योजना के तहत शुल्क में छूट दिसंबर 2010 तक बढ़ाई गई।
-निर्यातोन्मुख यूनिटों के लिए मार्च 2011 तक रियायतों की घोषणा।
-वर्ष 2010-2011 के लिए 200 अरब डॉलर का निर्यात लक्ष्य।
-अगले दो वर्षो तक 15 फीसदी की दर से निर्यात में वृद्धि। उससे आगे के वर्षो में 25 फीसदी की दर से वृद्धि का लक्ष्य।
-निर्यातकों द्वारा उठाए गए मुद्दों पर अंतर मंत्री स्तरीय समूह विचार करेगा।
-निर्यात संवर्धन पूंजीगत वस्तु योजना में शिकायतों को दूर किया गया।
- आभूषण सेक्टर के लिए कर वापसी योजना की अनुमति।
- हस्तांतरण लागत कम करने के लिए मिलने वाली प्रोत्साहन राशि पर कोई शुल्क नहीं।
- हस्तांतरण लागत कम करने के लिए निर्यातकों को प्रोत्साहित करने की योजना।
- देश में हीरा बाजार के लिए योजना।
- कृषि निर्यात के लिए एकल खिड़की प्रणाली।
- अनुप्रयुक्त चमड़ों के पुनर्निर्यात की अनुमति, 50 फीसदी शुल्क लगेगा।
- चाय के लिए न्यूनतम मूल्य वर्धित कर को 100 फीसदी से घटाकर 50 फीसदी किया गया।
- निर्यातोन्मुख सेक्टरों को घरेलू बाजार में 90 फीसदी उत्पाद बेचने की अनुमति।
- सार्वजनिक बैंकों के लिए डॉलर में साख उपलब्ध कराने की व्यवस्था।
- बाजार योजना के तहत 26 नए बाजारों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
- बाजार योजना के तहत रियायतों को 2.5 फीसदी से बढ़कर तीन फीसदी किया गया।
- निर्यातकों के लिए शुल्क मुक्त सैम्पलों की संख्या 15 से बढ़ाकर 50 की गई।
- व्यापार संबंधी दिक्कतों के समाधान के लिए नए डायरेक्ट्रेट की स्थापना होगी।
- प्रौद्योगिकी उन्नयन योजना के तहत शून्य शुल्क।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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