जजों की संपत्ति मामले पर विवाद गहराया

Karnataka High Court
बेंगलूर। हाईकोर्ट के जजों की संपत्ति की घोषणा का मुद्दा गहराता ही जा रहा है। प्रधान न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन के विचारों से असहमति जता चुके कर्नाटक हाई कोर्ट के जज शैलेंद्र कुमार ने मंगलवार को अपनी संपत्ति की घोषणा की। वहीं मद्रास हाई कोर्ट के एक जज ने कहा कि वह ऐसा करने के खिलाफ नहीं हैं। इससे पहले पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के एक जज ने अपनी संपत्ति घोषित की थी।

न्यायमूर्ति डी वी शैलेंद्र कुमार ने अपनी संपत्ति और देनदारियों का ब्यौरा दाखिल किया है। उल्लेखनीय है कि उन्होंने पहले कहा था कि प्रधान न्यायाधीश के जी बालाकृष्णन को हाईकोर्ट के सभी न्यायाधीशों की ओर से बोलने का कोई अधिकार नहीं है।

न्यायमूर्ति कुमार ने हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सोमवार को संपत्ति का ब्यौरा भेजा। हाई कोर्ट के सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ब्यौरे के साथ यह भी कहा गया है कि उसे सार्वजनिक भी किया जा सकता है। उन्होंने हाल ही में समाचार पत्र में प्रकाशित एक आलेख में कहा था कि मुख्य न्यायाधीश को हाई कोर्ट के सभी न्यायाधीशों की ओर से बोलने का कोई अधिकार नहीं है और यह धारणा गलत है कि हाईकोर्ट के न्यायाधीश संपत्ति घोषित करने के लिए तैयार नहीं हैं।

पब्लिसिटी स्टंट

वहीं प्रधान न्यायाधीश बालाकृष्णन ने अपने ब्लॉग पर संपत्ति घोषित करने की इच्छा जताने को एक पब्लिसिटी स्टंट बताते हुए कहा "न्यायमूर्ति कुमार प्रचार पसंद करते हैं" उन्होंने कहा कि इस तरह की चीजें किसी न्यायाधीश के लिए अच्छी नहीं हैं।

उधर मद्रास हाई कोर्ट के न्यायाधीश के चंदू्र ने कहा है कि वह अपनी संपत्ति घोषित किए जाने के खिलाफ नहीं हैं हालांकि वह इस संबंध में कानून की प्रतीक्षा करेंगे। उल्लेखनीय है कि पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के न्यायाधीश के कन्नन ने स्वच्च्छिक रूप से अपनी संपत्ति की घोषणा की थी। उन्होंने इसके लिए न्यायपालिका में आंतरिक तंत्र की स्थापना की भी वकालत की थी।

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