लालगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ अभियान में मानसून बना बाधक

सौधृति भवानी

कोलकाता, 26 अगस्त (आईएएनएस)। पश्चिम बंगाल के जनजातीय बहुल पश्चिमी जिलों में नक्सलियों के खिलाफ अभियान पर फिलहाल मानसून ने सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। बारिश और जल जमाव के कारण अभियान को अंजाम तक पहुंचाने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।

पश्चिमी मिदनापुर के पुलिस अधीक्षक एम.के वर्मा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "भारी मानसून के कारण कुछ इलाकों में हमें घोर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अधिकांश खेत पानी से भरे हैं। दूर-दूर तक पानी फैला हुआ है। हम ऐसे इलाकों से होकर आगे नहीं बढ़ सकते। दो महीने पहले इन इलाकों में हमारा अभियान जोर-शोर से चल रहा था। मानसून के कारण जंगली इलाकों से होकर गुजरना असंभव हो गया। इससे हमारा अभियान ढीला पड़ता जा रहा है।"

दो महीने पहले केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों और पश्चिम बंगाल पुलिस की ओर से नक्सलियों के खिलाफ अभियान शुरू किया गया। प्रशासन और नक्सलियों के बीच जंग का मैदान रहे लालगढ़ को उग्रवादियों से मुक्त कराना इस अभियान का खास मकसद रहा है। वैसे, नक्सलवाद प्रभावित दूसरे जिलों को भी अभियान के दायरे में लाया है। बांकुरा और पुरुलिया इनमें शामिल हैं।

सूत्रों के मुताबिक मौसम के बदले हुए मिजाज को देखते हुए सुरक्षा बलों ने अभियान की गति धीमी कर दी है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक(आपराधिक जांच विभाग)राज कनोजिया ने आईएएनस से बातचीत करते हुए कहा, "मौसम के बदलाव को देखते हुए हमने अपनी रणनीति बदल ली है। हमें दीर्घकालीन अभियान को सफल बनाने के लिए समय-समय पर रणनीति बदलते की जरूरत है।" कनोजिया इस अभियान का स्वरूप तय करने वाले शीर्ष पुलिस अधिकारियों में से एक हैं।

कनोजिया का कहना है लालगढ़ का जंगल घना होने के कारण जवानों को पूरी सावधानी बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मौसम के प्रतिकूल होने के कारण ही प्रशासन को रणनीति बदलनी पड़ी है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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