छत्तीसगढ़ में लाखों लोग रक्तल्पता के शिकार
सुजीत कुमार
रायपुर, 26 अगस्त (आईएएनएस)। छत्तीसगढ़ में करीब 30 लाख लोग सिकल सेल एनीमिया(रक्तल्पता) के शिकार हैं। यह आनुवांशिक असंतुलन ज्यादा गंभीर होने पर जानलेवा बन जाता है।
राज्य सरकार ने इस खतरे को गंभीरता से लेते हुए तीन से 15 आयुवर्ग के सभी लोगों की स्वास्थ्य जांच का आदेश दिया है और इस पर अमल जारी है। स्वास्थ्य अधिकारियों का उद्देश्य है शुरुआती चरण में ही रोग का पता लगाना। बीमारी से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा स्थापित सेंटर फॉर जेनेटिक एवं मॉलिक्यूलर बायोलॉजी ने लोगों के रक्त नमूनों के संग्रह और उनकी जांच के लिए छत्तीसगढ़ सिकल सेल स्क्रीनिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत की है।
उपरोक्त संस्थान के प्रभारी प्रदीप कुमार पात्रा ने आईएएनएस से बातचीत में कहा, "अकेले रायपुर जिले में ही करीब 200,000 लोगों की स्वास्थ्य जांच की जा चुकी है। इनमें से 9-10 फीसदी लोग इस बीमारी से ग्रस्त या सिकल सेल के वाहक पाए गए हैं।"
सरकार को उम्मीद है कि तीन से 15 वर्ष आयुवर्ग के लोगों की स्वास्थ्य जांच से इस बीमारी के वाहकों एवं रोग के संभावित खतरों का पता लगाकार इसे काबू में किया जा सकता है। ज्ञातव्य है कि सिकल सेल अनीमिया असाध्य रोग है।
इस बीमारी ने राज्य के सभी 18 जिलों में पांव फैला लिए हैं। इनमें 10 जिलों में हालात ज्यादा चिंताजनक हैं। इन जिलों में अन्य पिछड़े वर्गो, आदिवासियों, दलितों की आबादी अधिक है और इन्हें पर्याप्त पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता। लोगों में इस बीमारी को लेकर जागरूकता की कमी है।
अधिकारी ने कहा कि राज्य के ग्रामीण इलाकों में इस बीमारी के प्रति लोग जागरूक नहीं है। उनका मानना है कि यूं तो महाराष्ट्र, उड़ीसा, झारखंड, मध्य प्रदेश और आंध्र प्रदेश जैसे राज्य भी इसकी गिरफ्त में है पर छत्तीसगढ़ में समस्या ज्यादा चिंताजनक है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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