बाटला हाउस मुठभेड़ में नई जांच नहीं : उच्च न्यायालय (लीड-1)

बाटला हाउस मुठभेड़ के दौरान एक इंस्पेक्टर शहीद हो गया था और दो संदिग्ध आतंकवादी मारे गए थे।

मुख्य न्यायाधीश अजीत प्रकाश शाह और न्यायाधीश मनमोहन की खंडपीठ ने 19 सितम्बर 2008 को हुई मुठभेड़ की एक विशेष जांच दल से न्यायिक जांच की मांग करने वाली याचिका को खारिज कर दिया।

दक्षिण दिल्ली के जामिया नगर इलाके में हुई इस मुठभेड़ की जांच के लिए 'एक्ट नाउ फॉर हारमोनी एंड डेमोक्रेसी' (अनहद) नामक मानवाधिकार संगठन ने याचिका दायर की थी।

अपने विस्तृत आदेश में पीठ ने कहा, "एनएचआरसी एक संवैधानिक संस्था है और इस मामले में उसकी जांच संतोषप्रद है। मामले को जांच के लिए किसी तीसरे पक्ष के पास भेजना हमारे लिए बहुत कठिन है।"

न्यायालय ने कहा कि एनएचआरसी की प्रतिष्ठा और गरिमा कायम रहनी चाहिए और इस समय जांच किसी अन्य एजेंसी के हवाले करने की सलाह नहीं दी जा सकती।

एएनएचएडी की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने कहा कि एक संवैधानिक संस्था होने के नाते एनएचआरसी को मामले की उपयुक्त जांच करनी चाहिए। परंतु इसके विपरीत उसने पुलिस के दावे को सही ठहराया है, जो सही नहीं है। उनकी मांग थी कि पुलिस के दावे की गंभीरता से जांच की जानी चाहिए।

न्यायालय ने कहा, "सही स्थिति की कल्पना कर पाना बहुत कठिन है। हम अनुमान नहीं लगा सकते कि वहां क्या हुआ होगा क्योंकि हम विशेषज्ञ नहीं हैं। इसलिए इस स्थिति में जांच स्वीकार्य है।"

इसके साथ ही अदालत ने भारतीय प्रेस परिषद को नोटिस जारी कर कहा है कि इस तरह के मामलों में घटना को कवर करने के लिए क्या दिशा-निर्देश होना चाहिए। इस मसले पर अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को होगी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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