उप्र में बाढ़ से तबाही जारी, अब तक 45 की मौत
नेपाल से पानी छोड़े जाने और भारी बारिश के कारण पूर्वी उत्तर प्रदेश में बहने वाली घाघरा, सरयू, शारदा, राप्ती, बूढ़ी राप्ती, गंडक और घोघी निदयां उफान पर हैं। इन नदियों के उफान पर आने से सिद्धार्थनगर, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, सीतापुर, श्रावस्ती, कुशीनगर, गोरखपुर, बाराबंकी, गोंडा, देविरया, फैजाबाद और सिद्धार्थनगर जिलों के करीब 3000 गांव बाढ़ से जलमग्न हो गए हैं और लाखों लोग बेघर हो गए हैं।
बाढ़ प्रभावित 13 जिलों की 38 तहसीलों की करीब 10 लाख आबादी प्रभावित है। साढ़े चार लाख हेक्टेयर भूमि बाढ़ के चपेट में आई है। लोग घर-बार छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।
इस बीच सरकार की तरफ से दावा किया गया है कि बाढ़ का जलस्तर उतार पर है। फैजाबाद में सरयू, श्रावस्ती और सिद्धार्थनगर में राप्ती नदी और कुशीनगर में नारायणी नदी खतरे के निशान से नीचे पहुंच गई हैं। सूबे के बहराइच, गोरखपुर, देविरया, बाराबंकी और फैजाबाद जिलों में कहर बरपा रही घाघरा नदी के जलस्तर में कमी तो आई है लेकिन अभी इन जिलों में यह खतरे के निशान के ऊपर बह रही है।
सरकार ने दावा किया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए प्रभावित क्षेत्रों में राहत कैंप और लंगर आदि की व्यवस्था की गई है। बचाव कार्य में नावें, मोटरबोट, प्रांतीय सशस्त्र बल (पीएसी) की फ्लड बटालियन और चिकित्सकों की टीमें लगी हैं।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में अब तक बाढ़ से 45 लोगों को मौत हो चुकी है। बाढ़ से बहराइच और लखीमपुर खीरी जिले में सबसे विकट स्थिति है। लखनऊ-बहराइच मार्ग बाढ़ से डूबा हुआ है, जिससे राजधानी से बहराइच का सीधा सड़क संपर्क टूटा हुआ है।
बहराइच के जिलाधिकारी सुभाष चंद्र शर्मा ने बुधवार को आईएएनएस को बताया कि घाघरा नदी के जलस्तर में कमी दर्ज की गई है। लेकिन अभी भी वह खतरे के निशान से 30 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। जिले में बाढ़ की स्थिति भयावह है। जिले की चार तहसीलों में से तीन बाढ़ से प्रभावित हैं। इन तहसीलों के 300 से ज्यादा गांव पानी में डूब गए हैं, जिससे तीन लाख लोग बेघर हो गए हैं। शर्मा ने बताया कि पीएसी के जवानों की मदद ली जा रही है और प्रभावित लोगों को लगातार मोटरबोट तथा नौकाओं की मदद से राहत कैंपों में ले जाया जा रहा है।
लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी समीर वर्मा ने बताया कि धौरहरा, पलिया और निघासन तहसील के 350 गांवो में शारदा, घाघरा और नेपाल से आने वाली सुहेली और मोहाना निदयों का पानी घुस गया है। बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है। प्रभावित लोगों को राहत सामग्री वितरित कराई जा रही है।
बाढ़ के कहर से सिद्धार्थनगर जिले में 350 गांव, गोरखपुर में 260 गांव, सीतापुर में 400 गांव, कुशीनगर के 300 गांव और बाराबंकी में 350 गांव जलमग्न हो गये हैं, जिससे करीब 5 लाख लोग बेघर हो गए हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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