सीबीआई एक साल में करेगी मामले की जांच
देश की शीर्ष जांच एजेंसी के निदेशक अश्विनी कुमार ने कहा, "हमने अपनी सभी जांच को एक साल के भीतर पूरा करने का फैसला लिया है।"
सीबीआई के 17वें द्विवार्षिक और राज्यों के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के सम्मेलन में कुमार ने भ्रष्टाचार के मामलों की सुनवाई एक निश्चित समय सीमा के भीतर पूरा करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि आज भ्रष्टाचार की समस्या एक चिंता की बात है लेकिन यह ध्यान देने की जरूरत है कि नियमों व प्रक्रियाओं के ढेर, जिम्मेदारी का अभाव, नैतिम मूल्यों में गिरावट आदि ऐसे कारक हैं जो भ्रष्टाचार को फलने फूलने में सहायता कर रहे हैं।
अगस्त 2008 में सीबीआई के निदेशक की कुर्सी संभालने वाले अश्विनी ने कहा, "देश की कमजोर न्याय व्यवस्था भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे रही है। भ्रष्टाचार के मामलों की विभागीय जांच और सुनवाई वर्षो तक चलती है और इनमें होने वाली देरी भ्रष्ट लोगों को प्रोत्साहित करती है।"
उन्होंने कहा, "सीबीआई द्वारा दाखिल किए गए आरोप पत्रों में से 9,000 से अधिक मामले अदालत में लंबित हैं। इसमें हर वर्ष वृद्धि होती जा रही है।" उन्होंने कहा कि संदिग्ध लोगों के बारे में विभागीय जांच तीन से छह माह के भीतर और सुनवाई अधिकतम तीन साल के भीतर पूरी हो जानी चाहिए।
उन्होंने कहा, "कुछ लोग कहते हैं कि यह संभव नहीं है। हम सीबीआई में रहते हुए महसूस करते हैं कि यह संभव है यदि सरकार, न्यायपालिका और संसद एक साथ मिलकर काम करने के लिए प्रतिबद्ध हो तो।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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