पार्किं सन के रोगी सहज तरीके से बात कर सकते हैं
पर्ड्यू विश्वविद्यालय में वाणी, भाषा एवं श्रवण विज्ञान विभाग की सहायक प्रोफेसर जेसिका ह्यूवर ने बातचीत का यह तरीका सुझाया है। वह कहती हैं, "इस रोग से ग्रस्त लोगों को अमूमन बातचीत करने में लड़खड़ाहट होती है। आवाज में असामान्य कंपन होने के कारण वे सहज तरीके से बात नहीं कर पाते है। मेरा सूत्र बिल्कुल सरल है। ऐसे लोगों को ऊंचे स्वर में बोलने के लिए कहिए। इससे उनकी आवाज में स्पष्टता आएगी।"
उन्होंने जो तरीका विकसित किया है उसमें रोगियों को तेज बोलने को कहा जाता है, जबकि उनके बोलने के दौरान कई लोगों की बातचीत वाला कैसेट बजाया गया। कई लोगों की बातचीत वाला यह कैसेट किसी रेस्तरां तैयार किया गया।
वह कहती हैं, "जब मैंने इसके रोगियों से दो बार तेज बोलने के लिए कहा तो वे 10 डेसीबेल से ज्यादा तेज नहीं बोल पाए, लेकिन जब शोरगुल वाले कैसेट को साथ-साथ बजाया गया तो इन लोगों की आवाज 10 डेसीबेल से तेज हो गई।"
पृष्ठभूमि की आवाज के इस प्रभाव को 'लोंबार्ड प्रभाव' कहते हैं। सामान्य लोग भी शोरगुल के बीच तेज आवाज में बोलते हैं। इस रोग के मरीजों पर वे यही तरीका अपनाए जाने की सलाह देती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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