कश्मीर में बढ़ रही है शराब की दीवानगी
श्रीनगर, 26 अगस्त (आईएएनएस)। क्या कश्मीर घाटी में शराब की दीवानगी बढ़ रही है? अगर मिजाज में नशा घोलने वाले इस उत्पाद की बिक्री के आंकड़ों पर गौर करें तो आपको पक्का यकीन हो जाएगा कि घाटी में शराब का लुत्फ उठाने वालों की जमात अब पहले की तरह छोटी नहीं रह गई है।
शराब पर आतंकवादियों द्वारा वर्षो पुराने प्रतिबंध के बावजूद इसके शौकीनों की तादाद बढ़ रही है। इससे राज्य के आतिथ्य उद्योग ने भी राहत की सांस ली है। मुस्लिम बहुल कश्मीर घाटी में शराब की बिक्री नई ऊंचाई पर पहुंच चुकी है।
घाटी में नवंबर 2008 से जुलाई 2009 के बीच करीब 13 लाख बोतल शराब बिकी। इसकी पुष्टि सरकार ने खुद की है। पिछले कुछ वर्षो से शराब की बिक्री में लगातार इजाफा होता रहा है। वर्ष 2007-08 के दौरान घाटी में 800,000 बोतल से अधिक शराब बिकी।
घाटी की आबादी को देखते हुए यह आंकड़ा आनुपातिक तौर पर भले ही बड़ा नहीं है, पर 1989 से शराब पर आतंकवादियों द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के संदर्भ में अगर बात की जाए तो यह मामूली आंकड़ा नहीं है।
2006-07 में 500,000 बोतलें बिकी थीं। ऐसी स्थिति तब है जब घाटी में महज पांच लाइसेंसशुदा शराब दुकानें ही हैं। इन सभी दुकानों का धंधा तेज नहीं है, क्योंकि उच्च सुरक्षा क्षेत्र में होने के कारण कम ही लोग इन दुकानों से शराब खरीदने आते हैं।
प्रतिबंध के बावजूद कई रेस्तरांओं एवं होटलों में चोरी-छुपे शराब परोसने का सिलसिला जारी रहा। अब स्थिति बदल चुकी है। सप्ताहांत में श्रीनगर के होटलों के मदिरालयों में शराब दीवानों का जमघट लगा रहता है। वित्तमंत्री अब्दुल रहीम राठर के मुताबिक सरकार ने शराब पर शुल्क के जरिए 2007-08 में 242 करोड़ रुपए कमाए।
उल्लेखनीय है कि 1989 में अल्लाह टाइगर्स नामक आतंकी संगठन ने घाटी में शराब पर प्रतिबंध लगा दिया। बंदिशों के बावजूद शराब का जायका इसके दीवानों को मदिरालय की ओर खींचता रहा है। गुलमर्ग के एक होटल कारोबारी माजिद इकबाल कहते हैं, "यह बदलाव पर्यटन उद्योग के लिए शुभ संकेत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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