नेपाल में उपराष्ट्रपति पर इस्तीफे का दबाव बढ़ा
झा को उपराष्ट्रपति की कुर्सी तक पहुंचाने वाले मधेशी जनाधिकार मंच के नेता और पूर्व विदेश मंत्री उपेन्द्र यादव ने कहा है कि फिर से नेपाली में शपथ लेने के बदले उपराष्ट्रपति को पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
माओवादी पार्टी ने भी कहा है कि ऐसी स्थिति में झा को इस्तीफा दे देना चाहिए। वैसे पूर्व प्रधानमंत्री और पार्टी प्रमुख पुष्प कमल दहाल प्रचंड ने सर्वोच्च न्यायालय के फैसले की आलोचना की है।
सर्वोच्च न्यायालय के पांच न्यायाधीशों की विशेष पीठ ने रविवार को आदेश दिया कि झा एक हफ्ते के अंदर नेपाली भाषा में पद और गोपनीयता की शपथ लें अन्यथा उन्हें पद से हाथ धोना पड़ेगा।
ऐसा भी कहा जा रहा है कि झा को हिंदी के स्थान पर अपनी मातृभाषा मैथिली में शपथ लेनी चाहिए। नेपाल में नेपाली भाषा के बाद मैथिली सबसे अधिक बोली जाती है।
राष्ट्रपति रामबरन यादव और मंत्रियों ने झा से अपील की है कि वह फिर से नेपाली में पद की शपथ लें। यदि ऐसा होता है तो झा की कुर्सी तो बच जाएगी लेकिन उनकी साख जरूर कम होगी क्योंकि उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि उन्हें फिर से नेपाली भाषा में शपथ लेने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
उल्लेखनीय है कि दक्षिण नेपाल के तराई इलाके से ताल्लुक रखने वाले झा ने जुलाई 2008 में उपराष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। शपथ ग्रहण समारोह में वह धोती और कुर्ता पहनकर पहुंचे थे, जबकि इसे नेपाली वेश नहीं माना जाता।
झा के शपथ लेने के अगले ही दिन एक वकील ने उनके खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया था। वैसे नेपाल में हिदी फिल्मों का बड़ा बाजार है और लोग भी हिंदी भाषा का प्रयोग करते हैं लेकिन इसे आधिकारिक भाषा नहीं माना जाता है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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