व्यापक भ्रष्टाचार से धूमिल हो रही भारत की छवि : प्रधानमंत्री (लीड-1)
केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और राज्यों के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के 17वें द्विवार्षिक दो दिवसीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए मनमनोहन सिंह ने कहा, "एक न्यायपूर्ण, निष्पक्ष और न्यायसंगत समाज के निर्माण के प्रयास में बाधा डालने के साथ ही भ्रष्टाचार कई तरीकों से देश के आर्थिक विकास को नुकसान पहुंचा रहा है। "
उन्होंने सामाजिक क्षेत्र के कार्यक्रमों के लिए स्वीकृत लाखों रुपयों के संदर्भ में कहा, "भ्रष्टाचार से सबसे अधिक गरीब लोग प्रभावित होते हैं। हमारे कुछ सबसे महत्वाकांक्षी और विस्तृत कार्यक्रम समाज के गरीबों और वंचितों की मदद के लिए हैं। परंतु सरकार जो कुछ भी उपलब्ध कराती है वह वास्तविक लाभार्थियों तक नहीं पहुंचता। चाहे वह गरीबों को कम दर पर खाद्यान्न, कर्ज, छोटे और सीमांत किसानों के लिए उर्वरक या बीज या फिर बेरोजगारों के लिए रोजगार कार्यक्रम हो।"
उन्होंने कहा कि यह सभी के लिए सामूहिक चिंता का विषय होना चाहिए।
सिंह ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष मूल्यों और "आजादी की प्रतिबद्धता" के लिए पूरी दुनिया में सम्मानित देश की छवि को भ्रष्टाचार धूमिल रहा है।
उन्होंने कहा कि 'भ्रष्टाचार की बुराई' से 'प्रभावी और तत्काल' निपटा जाना चाहिए क्योंकि यह 'देश को आगे बढ़ाने के हमारे प्रयासों' को कमजोर कर रहा है।
सिंह ने कहा, "विश्व हमारे लोकतंत्र, हमारे बहुलवादी और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों, हमारी स्वतंत्र न्यायपालिका और मुक्त प्रेस, स्वतंत्रता और शांति तथा न्यायपूर्ण और समग्र विकास के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का सम्मान करता है।" परंतु 'देश में व्यापक रूप से फैला भ्रष्टाचार हमारी छवि खराब कर रहा है।'
विज्ञान भवन में हो रहे सम्मेलन में प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आगे बढ़ रहा है और विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ रहा है, लेकिन सवरेत्कृष्ट प्रौद्योगिकी और संसाधनों के उपयोग में भ्रष्टाचार लगातार बाधा बना हुआ है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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