देश में निर्मित टी-90 टैंक सेना में शामिल

इस मौके पर पल्लम राजू ने दावा किया कि इन टैंकों में 70 फीसदी देशी कलपुर्जे का उपयोग किया गया है। इसी के साथ भारत ने पूरी तरह से स्वदेश निर्मित टैंक के विकास की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। ये टैंक दुनिया के सबसे बेहतरीन टैंकों में से एक है जो रात में भी लड़ने में सक्षम हैं। परमाणु हमलों के दौरान यह चालक दल की सुरक्षा करने में भी सक्षम है।
इसके अलावा इस टैंक में कई अन्य खूबियां भी हैं जैसे मोबिलिटी, लड़ने की क्षमता, सुरक्षा व कम्युनिकेशन की नई प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल। 125 एमएम तोप। 12.7 एमएम की विमानभेदी तोप। 7.62 एमएम की को-एक्सिअल मशीन गन और हमले के लिए स्वचालित लोडर
वहीं दूसरी ओर रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 'भीष्म" टैंक में स्वदेशी कलपुर्जे का इस्तेमाल रक्षा राज्य मंत्री के दावे से कम किया गया है। उनके मुताबिक, इन टैंकों में इस्तेमाल किए गए ज्यादातर कलपुर्जे रूस निर्मित हैं, जबकि कुछ छोटे कलपुर्जे देश में बने हैं। यहां से 20 किलोमीटर दूर आवडी स्थित हैवी व्हीकल फैक्ट्री (एचवीएफ) ने सालाना 100 भीष्म टैंक बनाने की योजना बनाई है।


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