जलवायु परिवर्तन का रहस्य सुलझाने की जद्दोजहद में जुटे हैं वैज्ञानिक
जंगफ्रॉजोज(स्विटजरलैंड), 25 अगस्त (आईएएनएस)। जासूसी कथाकार अगाथा क्रिस्टी के प्रशंसकों को याद होगा कि कैसे उनके एक उपन्यास का पात्र हक्र्यूल पॉयरॉट दुनिया से कटे एक बर्फीले इलाके के एक उत्तुंग रेलवे स्टेशन पर एक हत्याकांड का रहस्य सुलझाने के लिए जद्दोजहद करता है। ठीक इसी तरह 'यूरोप की छत' कहे जाने वाले आल्प्स पर्वत पर हजारों वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन का रहस्य जानने के लिए वर्षो से घोर जद्दोजहद कर रहे हैं।
इस पर्वत पर आने वाले सैलानी यह जानकार हैरान हुए बगैर नहीं रहते कि हर समय यहां औसतन करीब 1200 वैज्ञानिक जलवायु परिवर्तन की गुत्थियां सुलझाने के मिशन पर लगे रहते हैं। इनमें भारत के वैज्ञानिक भले ही शामिल नहीं हैं, पर दूसरे देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले कई भारतीय वैज्ञानिक इस जमात में जरूर शामिल हैं।
समुद्र की सतह से 35,00 मीटर की ऊंचाई पर बने इंटरनेशनल फाउंडेशन हाई आल्टीट्यूड रिसर्च स्टेशन की प्रयोगशालाओं को दुनिया के लिए सिरदर्द बनी जलवायु परिवर्तन की समस्या की गुत्थियां सुलझाने का उपयुक्त ठिकाना माना जा रह है।
शोध की इस चोटी पर पहुंचकर आईएएनएस की यह संवाददाता इस स्टेशन के निदेशक इर्विन फ्लकिगर से संपर्क करने में सफल रही। इर्विन ने इस संवाददाता से बातचीत करते हुए कहा, "इस चोटी की रणनीतिक स्थिति इसे अनूठा शोध क्षेत्र बनाती है। ऐसे में जब जलवायु परिवर्तन हमारी मुख्य चिंता है, इस स्टेशन का महत्व काफी बढ़ गया है।" उन्होंने कहा कि अगर भारत के वैज्ञानिक इस शोध में यहां शामिल होते हैं तो उन्हें खुशी होगी। यूं कई भारतीय वैज्ञानिक यहां शोधरत हैं, पर वे दूसरे देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
1931 में स्थापित यह प्रख्यात शोध केंद्र वैज्ञानिकों को शोध के लिए पर्याप्त सुविधाएं मुहैया कराता है। 1912 में जंगफ्रॉ रेलवे के निर्माण ने इस चोटी पर ऐसे अनूठे स्टेशन की स्थापना का रास्ता साफ कर दिया। यह शोध केंद्र एवं यहां की स्फिंक्स प्रयोगशाला मुख्यत: पर्यावरण विज्ञान को ही समर्पित हैं। यहां 62 फीसदी शोध जलवायु परिवर्तन को ही समर्पित है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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