बिहार में नए दिशा-निर्देशों के तहत स्वाइन फ्लू के मरीजों की जांच
तय दिशा-निर्देश के अनुसार जिन्हें साधारण बुखार, खांसी, गले में खराश और शरीर में दर्द है, उनका स्वास्थ्य परीक्षण किया जाए लेकिन उनके स्वाइन फ्लू के लिए नमूने लेने की जरूरत नहीं है। ऐसे मरीजों पर 24 से 48 घंटे तक नजर रखी जाएगी और उन्हें परिवार के अन्य सदस्यों से संपर्क न करने की सलाह दी गई है। ऐसे मरीजों को ए श्रेणी में रखा गया है।
श्रेणी बी में उन मरीजों को रखा गया है जिन्हें तेज बुखार हो और वे पांच साल तक के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, 65 साल से अधिक के बुजुर्ग और ह्रदय रोगी हों। ऐसे सभी मरीजों को उपचार के लिए टेमी फ्लू की गोली देने को कहा गया है। ऐसे मरीजों को भी न तो भर्ती करने की जरूरत है और न ही नमूनों की जांच आवश्यक है।
दिशा-निर्देशों के अनुसार ए तथा बी श्रेणी के लक्षणों के अलावा सांस लेने में तकलीफ , सीने में दर्द, रक्त चाप कम होना, नाखून नीले पड़ जाना, ऐसे मरीजों को चिकित्सकों की देखरेख मे रखा जाएगा और उनके चिकित्सीय नमूनों को जांच के लिए भेज कर टेमी फ्लू की गोली दी जाएगी।
पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के माइक्रो बॉयोलॉजी विभाग के अध्यक्ष डॉ़ शंकर प्रकाश ने मंगलवार को बताया कि केन्द्र सरकार द्वारा सोमवार को दिए गए दिशा-निर्देशों पर ही अस्पताल में स्वाइन फ्लू के संदिग्ध मरीजों की जांच की जा रही है।
इधर स्वास्थ्य विभाग के एक अधिकारी के अनुसार स्वाइन लू से निपटने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा बिहार में टेमी फ्लू की चार लाख गोलियां उपलब्ध करवाई गई हैं। इन्हें राज्य के सभी जिला मुख्यालयों में सिविल सर्जन कार्यालय तथा मेडिकल कॉलेजों में भेजा जा रहा है।
उल्लेखनीय है कि बिहार में अब तक एक मरीज में स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि हुई है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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