चिंतन बैठक के बाद भी भाजपा में थमा नहीं चिंताओं का दौर (राउंडअप)
सोमवार को सुबह-सुबह उसका हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के साथ गठबंधन टूट गया और शाम होते-होते उसके एक वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बगावती तेवर अपना लिए तो पार्टी के राष्ट्रीय सचिव व पूर्व सांसद ने पूर्वोत्तर में उसे तगड़ा झटका देते हुए कांग्रेस का हाथ थाम लिया।
हरियाणा विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भाजपा और इनेलो का गठबंधन टूट गया। भाजपा अब अपने दम पर यहां चुनाव लड़ने का खम ठोक रही है। भाजपा महासचिव व हरियाणा के प्रभारी विजय गोयल ने संवाददाताओं से चर्चा में सोमवार को यह घोषणा की।
उन्होंने कहा, "यह गठबंधन हमारे कारण नहीं बल्कि सीटों के बंटवारे पर इनेलो के अड़ियल रवैये के कारण टूटा है। हरियाणा की हमारी इकाई गठबंधन को लेकर खुश नहीं थी। सीटों के बंटवारे को लेकर कई दौर की बातचीत हुई। हमने अपने हिस्से की सीटें बढ़ाने के लिए उन्हें मनाने का प्रयास किया लेकिन वे इसके लिए तैयार नहीं हुए।"
देर शाम पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी ने बगावती तेवर अपनाते हुए पार्टी और पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मौजूदा नेतृत्व से भाजपा का भला नहीं होगा। इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को आगे आकर चाबुक चलाना होगा और पूरी पार्टी का कायाकल्प करना होगा। वह भी नीचे के स्तर से नहीं बल्कि शीर्ष स्तर से।
शौरी ने देर शाम पत्रकारों से चर्चा में कहा, "पार्टी का पुनर्गठन करने की आवश्यकता है। नीचे से ऐसा करने में 25 साल लग जाएंगे। इसलिए शीर्ष स्तर पर यह पुनर्गठन करना होगा।"
उन्होंने कहा, "पार्टी का कायाकल्प करना होगा। यह वर्तमान नेतृत्व से नहीं होगा। मौजूदा नेतृत्व तो म्यूचुअल प्रोजेक्टिंग और प्रोटेक्टिंग सोसाइटी बन गई है। आरएसएस को चाबुक चलाना होगा।"
यह पूछे जाने पर कि क्या आडवाणी को अपना पद छोड़ देना चाहिए। इसके जवाब में शौरी ने कहा, "एक आदमी के हटने से बिल्कुल कुछ नहीं होगा। एक दो नहीं सारी की सारी टॉप लीडरशीप को हटाना होगा। राज्यों से मेहनती और ईमानदार नेताओं को चुनकर सामने लाना होगा।"
उन्होंने कहा, "मुझ पर कार्रवाई की बात की जा रही है। पार्टी नेतृत्व उठाए गए मुद्दों व समस्याओं को नहीं देख रहा है। वह कार्रवाई की बात कर रहा है। .. तो कर लो कार्रवाई। मैं आज नहीं पिछले तीन वर्षो से कह रहा हूं। आरएसएस और भाजपा के शीर्ष नेताओं तक के सामने मैंने पार्टी हित में मुद्दे उठाए। लेकिन कुछ नहीं हुआ। जब कोई विकल्प नहीं रहा तभी मैं बोल रहा हूं।"
भाजपा से निकाले गए पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह के निष्कासन के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "किताब पढ़े बिना उन्हें निष्कासित कर दिया गया। यह तो कमाल है। यह निर्मित नाराजगी थी। पुस्तक का उत्तर पुस्तक होता है। ऐसी कार्रवाई का कोई फायदा नहीं।"
पार्टी के मौजूदा हालात पर कड़े तेवर अपनाते हुए शौरी ने इससे पहले एक टेलीविजन चैनल से साक्षात्कार में भाजपा नेतृत्व में आमूल-चूल परिवर्तन की बात कही।
उन्होंने कहा कि पार्टी की समस्याओं को उठाने के प्रयासों को अनुशासनहीनता करार दिया जा रहा है। शौरी ने कहा कि लोकसभा चुनाव के बाद उन्होंने कुछ मुद्दों को उठाते हुए पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह को पत्र लिखा था, जिसके बारे में उनके किसी करीबी को भी नहीं पता था और न ही मैंने इसे मीडिया में लीक की लेकिन इसके एवज में मुझ पर अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई।
शौरी के बगावती तेवरों के बीच पार्टी को झटका देने वाली खबर पूर्वोत्तर से आई। पार्टी के युवा चेहरों में शुमार किए जाने वाले राष्ट्रीय सचिव व पूर्व सांसद किरेन रिजिजू ने पार्टी छोड़ दी और कांग्रेस का हाथ थाम लिया।
इटानगर में एक कार्यक्रम में रिजिजू ने औपचारिक तौर पर भाजपा छोड़ने और कांग्रेस में शामिल होने का ऐलान किया। रिजिजू पिछला लोकसभा चुनाव हार गए थे। उन्हें कांग्रेस के टकम संजय ने हराया था।
उल्लेखनीय है कि 38 वर्षीय रिजिजू उत्तर पूर्व में भाजपा के सबसे बड़े और युवा चेहरे थे। पिछी लोकसभा में वे पार्टी के मुखर वक्ताओं में थे। पार्टी ने इसी उम्र में उन्हें राष्ट्रीय सचिव बना दिया था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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