दिल्ली में रोजाना औसतन 17 बच्चे होते हैं गायब
नई दिल्ली, 25 अगस्त (आईएएनएस)। वर्ष 2008 में दिल्ली में रोजाना औसतन 17 बच्चे गायब होते रहे, पर दिल्ली पुलिस समय रहते सक्रिय होने में असफल रही। सरकार द्वारा गठित एक अधिकारवादी निकाय ने दिल्ली उच्च न्यायालय को दी गई अपनी रिपोर्ट में यह कहा है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "पुलिस तय अवधि में सक्रिय होने में विफल रही और समय बढ़ने के साथ ही ऐसे मामले उलझते गए।" अदालत बुधवार को इस मसले पर सुनवाई करेगी। दिल्ली बाल अधिकार सुरक्षा आयोग की रिपोर्ट दिल्ली पुलिस की सुस्ती को पुष्ट करती है।
रिपोर्ट में कहा गया है, "जैसे ही पुलिस को पता चले कि कोई बच्चा गायब हुआ है, उसे चाहिए कि वह मामले के बारे में मिसिंग(पर्सन्स) स्क्वै ड को अवगत कराए। इसके बाद यह स्क्वैड 3 से 4 घंटे के भीतर इसकी जानकारी केंद्रीय जांच ब्यूरो(सीबीआई) को दे। लेकिन पुलिस ऐसा करने में विफल रही है।" पुलिस इस मामले में कीमती वक्त जााया कर देती है और मामला उलझ जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार किशोर न्याय कानून की धारा 63 यह अनिवार्य करती है कि विशेष किशोर पुलिस को सामान्य पुलिस द्वारा मामले की जानकारी दी जाए। इसके बाद विशेष किशोर पुलिस इसकी सूचना डीसीपीसीआर को देगी।
वर्ष 2008 में राजधानी से 2,210 बच्चे गायब हुए। इससे पहले की सुनवाई में पुलिस ने स्वीकार किया था कि उसने ऐसे सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं की थी। इस पर अदालत ने नाराजगी जताई थी।
अदालत का मानना है असली आंकड़ा इससे कहीं बड़ा होगा, क्योंकि ऐसे सभी मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं होती। इसमें यह भी कहा गया है कि लापता बच्चों के परिवार वालों के प्रति पुलिस का रवैया संवेदनहीन रहा है। पुलिस कई बार ऐसे परिवारों से अच्छा व्यवहार नहीं करती।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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