जीत गई मां की ममता
कहानी कुछ कुछ फिल्मों जैसी है। जबलपुर के ग्वारीघाट में रहने वाली प्रतिभा मोयल के पति रवींद्र की मौत होते ही परिवार के लोगों का स्वभाव बदल जाता है और उसे ससुराल छोड़कर मायके आना पड़ता है। वह ससुराल के लोगों से बेटी को तो किसी तरह लेकर आ जाती है मगर सवा साल का बेटा उससे छीन लिया जाता है। यह वाकया अप्रैल 2008 का है।
प्रतिभा की वकील अमन शर्मा बताती है कि पहले पति का साथ छूटा और फिर ससुराल के लोगों द्वारा बेटे को छीन लिए जाने से प्रतिभा सदमे में थी परंतु हिम्मत नहीं हारी। पहले थाने में शिकायत की फिर अदालत गई। बात नहीं बनी तो उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
न्यायाधीश दीपक मिश्रा और आर. के. गुप्ता की खंडपीठ के निर्देश पर 10 अगस्त को ढाई वर्षीय सुशील सहित अन्य परिजनों को पुलिस अभिरक्षा में न्यायालय में लाया गया। वहां सुशील बुआ निशा की गोद से मां प्रतिभा की तरफ आ गया। उस दिन न्यायालय ने मां और बच्चे की हर गतिविधि की वीडियो रिकार्डिंग कराई। उसके बाद बच्चे को 14 दिन के लिए मां के सुपुर्द किया और अगली सुनवाई 24 अगस्त तय की।
अमन शर्मा के अनुसार सोमवार को न्यायालय में बच्चे को लाया गया और सुशील को प्रतिभा के सुपुर्द करने के आदेश दिए। उन्होंने आगे बताया कि प्रतिभा के ससुराल पक्ष के लोगों का आरोप था कि सुशील अपनी मां को जानता तक नहीं है और उसका स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है परंतु 14 दिन में ऐसा कुछ नहीं हुआ।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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