आईआईटी प्रोफेसर सामूहिक आकस्मिक छुट्टी पर गए
आईआईटी-मुंबई के प्रोफेसर सौम्य मुखर्जी ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "सरकार द्वारा की गई वेतन बढ़ोतरी निचले स्तर पर कम से कम 30 फीसदी और उच्च स्तर पर 40 फीसदी कम है। ऐसे में हम बेहतरीन संकाय सदस्यों को कैसे आकर्षित कर पाएंगे? हम वेतन में असमानता का विरोध करते हैं।"
हाथों में तख्तियां थामे ये प्रोफेसर संस्थान परिसर से कतारबद्ध होकर निकले और अपनी आवाज बुलंद की। उनका तर्क है कि आईआईटी में प्रोफेसर बनने के लिए किसी भी छात्र को पीएचडी करनी पड़ती है जिसमें करीब छह साल लगते हैं। इस अवधि तक छात्र को आय से वंचित होना पड़ता है। अगर यही छात्र सरकारी अधिकारी बन जाता है तो वह इस अवधि में कम से कम 23 लाख रुपए वेतन व भत्ते के तौर पर अर्जित कर सकता है। जाहिर है प्रोफेसर बनने के लिए काफी त्याग की जरूरत होती है।
आईआईटी-रूड़की के निदेशक एस.सी सक्सेना ने आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, " छठे वेतन आयोग की सिफारिशों को लेकर थोड़ा असंतोष है। इस मसले पर मैं इन प्रोफेसरों से बात करूंगा।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस


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