अब पाश्चात्य संगीत में भी प्रशिक्षण देगा भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय
विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर श्रुति सडोलीकर काटकर ने सोमवार को आईएएनएस से बातचीत में कहा कि इस कदम से उन छात्रों को बहुत मदद मिलेगी जो भारत के बाहर पाश्चचात्य संगीत में नाम कमाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हम पाश्चात्य संगीत को दरकिनार नहीं कर सकते। सीखने के लिए इसमें भी बहुत कुछ है।
काटकर ने कहा कि हमें भरोसा है कि पाश्चात्य संगीत का प्रशिक्षण देने के हमारे कदम की दुनिया के विभिन्न हिस्सों में सराहना होगी और संगीत के प्रचार-प्रसार का हमारा उद्देश्य और ज्यादा सुदृढ़ होगा।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों के मुताबिक शुरू में छात्रों को पियानो और ब्रास व स्ट्रिंग श्रेणी में आने वाले पाश्चात्य संगीत के विभिन्न वाद्ययंत्रों को बजाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। बाद में आने वाली प्रतिक्रियाओं के आधार पर पाठ्यक्रमों में आवश्यक संसोधन कर इनका विस्तार किया जाएगा। अगले कुछ महीनों के अंदर पाश्चात्य संगीत में छात्रों को प्रशिक्षण देने वाले संकाय सदस्यों की नियुक्ति कर ली जाएगी।
ज्ञात हो कि भातखंडे संगीत विश्वविद्यालय में चार संकाय गायन, संगीत, नृत्य और वाद्ययंत्र हैं। इस विश्वविद्यालय की स्थापना सन 1927 में महान संगीतकार पंडित विष्णु नारायण भातखंडे ने की थी। उन्हीं के नाम पर इसका नाम रखा गया। यहां पर श्रीलंका, नेपाल सहित विश्वभर से छात्र नृत्य और शास्त्रीय संगीत की शिक्षा लेने आते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।


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